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पश्चिम बंगाल के इस गांव में ‘मुसलमानों के विरोध’ की वजह से दुर्गा पूजा पर है प्रतिबंध

Published on 25 September, 2016 at 11:18 am By

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित कांगलापहाड़ी गांव के लोग इस साल भी दुर्गा पूजा का आयोजन नहीं कर सकेंगे। यह लगातार चौथा वर्ष है जब इस गांव की बहुसंख्यक हिन्दू आबादी को दुर्गा पूजा के आयोजन से रोक दिया गया है।

डेली मेल की इस रिपोर्ट के मुताबिक, गांव में ही रहने वाले कुछ मुस्लिम परिवारों को दुर्गा पूजा से आपत्ति है, और यही वजह है कि प्रशासन ने यहां दुर्गा पूजा का आयोजन प्रतिबंधित कर रखा है।


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रिपोर्ट में बताया गया है कि कांगलापहाड़ी गांव में रहने वाले लोगों को दुर्गा पूजा देखने के लिए दूसरे गांव में जाना पड़ता है। यही वजह है कि यहां रहने वाले 300 हिन्दू परिवारों ने गांव में ही दुर्गा पूजा आयोजन की परम्परा शुरू करने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने इसके लिए जमीन दान दिया और मंदिर निर्माण का काम शुरू किया गया। दुर्गा पूजा के लिए प्रतिमा निर्माण भी शुरू हो गया, लेकिन इसी गांव में रहने वाले करीब 25 मुस्लिम परिवारों को दुर्गा पूजा के आयोजन का निर्णय पसंद नहीं आया। उन्होंने इसका विरोध किया और प्रशासन से इस बारे में शिकायत की। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए दुर्गा पूजा के आयोजन पर रोक लगा दी। दुर्गा पूजा पर रोक लगाने की वजह को कानून-व्यवस्था का मामला बताया गया है।

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल भी ग्रामीण प्रशासन के सामने गुहार लगा रहे हैं। ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल एसपी से लेकर SDM तक मिल चुका है, लेकिन अब तक प्रशासन की तरफ से उन्हें दुर्गा पूजा की अनुमति नहीं दी गई है। रिपोर्ट में बीरभूम के पुलिस अधीक्षक एन. सुधीर कुमार के हवाले से बताया गया है कि अब तक उनके सामने इस तरह का कोई मामला नहीं आया है।



वहीं, दूसरी तरफ कांगलापहाड़ी दुर्गा मंदिर कमेटी के चंदन साउ बताते हैं कि इस बारे में 1 सितंबर को जिला पुलिस अधीक्षक और जिलाधीश के समक्ष अपील की गई थी। 23 सितंबर, यानि दो दिन पहले ही इस बारे में दूसरी बार अपील की गई, लेकिन अब तक प्रशासन की तरफ से कोई जवाब नहीं मिल सका है।

साउ कहते हैं कि दुर्गा पूजा न होने की वजह से ग्रामीणों को 3-8 किलोमीटर तक की दूरी तय कर दूसरे गांवों में जाना पड़ता है।

इस बारे में जब जिलाधीश पी. मोहनगांधी से पूछा गया तो उन्होंने इसे टालने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इस बारे में जरूरी अनुमति देने का अधिकार SDO के पास है। वह कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखकर इस बारे में निर्णय लेते हैं।


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दूसरी तरफ, इस मामले को स्थानीय प्रशासन तक ले जाने वाले ध्रुब साहा ने कहा कि इस संंबध में कलकत्ता हाई कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है, जिस पर सुनवाई सोमवार को होगी।

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