मच्छरों के दुश्मन ड्रैगनफ्लाई की दिल्ली में मिलीं पांच दुर्लभ प्रजातियां

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Updated on 5 Sep, 2018 at 1:02 pm

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मच्छरों की बढ़ती आबादी पूरे देश के लिए विकट समस्या है। यही कारण है कि इनके रोकथाम और ख़ात्मे के लिए बाज़ार में तरह-तरह के उत्पाद मौजूद हैं। कछुवा छाप से लेकर मॉस्किटो रैकेट तक साल भर में करोड़ों का व्यापार कर जाती है। पर मच्छरों का आतंक और उनसे उपजने वाले डेंगू मलेरिया जैसी बीमारियों का अंत फिलहाल नज़र नहीं आता है। हालांकि, एक जीव ऐसा भी है जिसको मच्छरों का दुश्मन भी कहा जाता है।

 

हम बात कर रहे हैं ड्रैगनफ्लाइज की, जिन्हें हम बचपन में हेलीकॉप्टर भी बुलाते थे और पुछल्ले पर धागा बांधकर उड़ाया भी करते थे। दरअसल यह मच्छरों के बहुत बड़े दुश्मन हैं और भोजन में सिर्फ़ मच्छरों का लार्वा ही खाना पसंद करते हैं।

 

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मच्छरों के दुश्मन हमारे दोस्त हैं ड्रैगनफ्लाईज

 

वैज्ञानिक मच्छरों के आतंक से निपटने के ओडोनाटा परिवार के इन कीट प्रजातियों के संरक्षण पर ज़ोर दे रहे हैं। इसके तहत दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्रों में ड्रैगनफ्लाई की गिनती पूरी हो गई है। गिनती के दौरान पांच दुर्लभ प्रजातियों सहित ड्रैगनफ्लाई की दिल्ली में कुल 27 प्रजातियां मिली हैं।

 

 

 ड्रैगनफ्लाई की 500 प्रजातियां भारत में पाई जाती हैं।

 

दुनिया में ड्रैगनफ्लाई परिवार की कुल 5329 प्रजातियां मौजूद हैं, इनमें से 500 प्रजातियां भारत में पाई जाती हैं। इनकी प्रजातियों की गिनती काम बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएचएनएस) के केंद्र प्रबंधक सोहेल मदान के नेतृत्व में शुरू हुआ है। कीट वैज्ञानिक मोहम्मद फैसल ने यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क में कीट प्रजातियों की गिनती की। मदान ने बताया कि गिनती के लिए महीनों से तैयारी चल रही थी। कई लोगों को प्रशिक्षित किया गया। 11 टीमों ने दिल्ली, हरियाणा और आसपास गिनती की।

 

 

गिनती में मिली पांच दुर्लभ ड्रैगनफ्लाई प्रजातियां

 

आपको बता दें इनकी गिनती असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य, यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क, नीला हौज बायोडायवर्सिटी पार्क, ओखला पक्षी विहार, धनौरी वेटलैंड, सूरजपुर वेटलैंड, नजफगढ़ वेटलैंड, बसई वेटलैंड, लोधी गार्डन व अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क में की गई। इस गणना में फुलवोस फॉरेस्ट स्किमर, यलो टेल्ड एशी स्किमर, थ्री स्ट्राइप्ड ब्लू डार्ट, ग्राउंड स्किमर, रेड मार्श ट्रॉटर नाम की पांच दुर्लभ प्रजातियों वाली ड्रैगनफ्लाई मिली हैं।



 

 

डायनासोर के पूर्वज हैं ओडोनाटा परिवार के यह ड्रैगनफ्लाइज

 

ओडोनाटा का मतलब जबड़े वाले जीव से है। सबसे पहले इनके ही जबड़े तैयार हुए। इस वजह से इन्हें ओडोनाटा कहा जाता है। ओडोनाटा या ड्रैगनफ्लाई डायनासोर से भी पुराने जीव हैं इसलिए इनको डायनासोर का पूर्वज भी कहा जाता है पहले इनकी लंबाई करीब 20 इंच तक होती थी। इनके जबड़े बड़े सख्त होते हैं। विकास क्रम में इनकी लंबाई घटकर 3 से 4 इंच तक हो गई है।

 

पहली बार उड़ान भरने वाला कीट

 

यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क के प्रभारी और वैज्ञानिक डॉ. फैयाज ए. खुदसर बताते हैं कि मच्छरों के आतंक से बचने के लिए ऐसे कीटों की सख्त जरूरत है। इनका जन्म करीब 22 करोड़ वर्ष पूर्व हुआ था जो कि धरती पर पहली उड़ान भरने वाले कीट भी हैं। हालांकि इनका परिवार काफी समृद्ध होता था, क्योंकि पहले साफ जलाशय थे। अब अतिक्रमण के कारण न तो नम भूमि बची है और न ही साफ जलाशय। ऐसे में इनकी आबादी तेजी से घट रही है।

 

 

ड्रैगनफ्लाई का लार्वा भी खाता है मच्छरों के अंडे

 

डॉ. फैयाज ने बताया कि ओडोनाटा परिवार के इन ड्रैगन कीट लार्वा को नायड्स कहते हैं। साफ पानी ही इनके जीवन की शर्त है। आमतौर पर यह लारवा 6 से 8 महीने पानी में रहते हैं। इस दौरान इनका आहार मच्छरों के अंडे होते हैं। कुछ लारवा 6 से 8 वर्ष तक पानी में मौजूद रहते हैं। वहीं वयस्क ड्रैगनफ्लाई का आहार भी खून चूसने वाले मच्छर ही हैं।

 

ड्रैगनफ्लाईज (Dragonfly)

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