डॉ. सर्वपल्‍ली राधाकृष्णन के जन्मदिन पर ही क्यों शिक्षक दिवस मनाया जाता है, दिलचस्प है इसकी कहानी

author image
Updated on 5 Sep, 2018 at 2:23 pm

Advertisement

देश के पहले उप-राष्ट्रपति और दूसरे राष्‍ट्रपति सर्वपल्‍ली राधाकृष्‍णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत रत्‍न, ऑर्डर ऑफ मेरिट, नाइट बैचलर और टेम्‍पलटन जैसे कई पुरुस्कारों से नवाजे गए डॉ. सर्वपल्ली राजनीति में आने से पहले उन्होंने अपने जीवन के 40 साल अध्यापन को दिये थे।

 

 


Advertisement

उनका कहना था कि जहां कहीं से भी कुछ सीखने को मिले उसे अपने जीवन में उतार लेना चाहिए। वह पढ़ाने से ज्यादा छात्रों के बौद्धिक विकास पर जोर देने की बात करते थे।

 

वह पढ़ाई के दौरान काफी खुशनुमा माहौल बनाकर रखते थे। 1954 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

 

 

शिक्षक की दी हुई शिक्षा से ही बच्चे आगे चलकर देश के कर्णधार बनते हैं। ऐसी ही शिक्षा डॉ. सर्वपल्ली दिया करते थे।

 

उनका मानना था कि शिक्षक वह नहीं जो छात्र के दिमाग में तथ्यों को जबरन ठूंसे, बल्कि वास्तविक शिक्षक तो वह है जो उसे आने वाले कल की चुनौतियों के लिए तैयार करें।

 

लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर क्यों डॉ. सर्वपल्‍ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के दिन ही शिक्षक दिवस मनाया जाता है?

 



 

वैसे तो विश्व शिक्षक दिवस का आयोजन पांच अक्टूबर को होता है, लेकिन इसके अलावा विभिन्न देशों में अलग-अलग तारीखों पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है। ऑस्ट्रेलिया में यह अक्टूबर के अंतिम शुक्रवार को और भूटान में दो मई तो ब्राजील में 15 अक्टूबर को मनाया जाता है। कनाडा में पांच अक्टूबर, यूनान में 30 जनवरी, मेक्सिको में 15 मई, पराग्वे में 30 अप्रैल और श्रीलंका में छह अक्टूबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।

लेकिन भारत में शिक्षक दिवस  राधाकृष्णन के जन्मदिन के दिन मनाया जाता है। 5 सितंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुतनी ग्राम में जन्में डॉ. राधाकृष्णन अपने जीवन में एक आदर्श शिक्षक रहे। उनके छात्र उनका सम्मान और स्नेह करते थे। साल 1962 की बात है, जब एक बार उनके शिष्यों और प्रसंशकों ने उनका जन्मदिन मनाने का निश्चय किया। इस बारे में जब वो डॉ. सर्वपल्ली से अनुमति लेने पहुंचे तो उन्होंने कहा कि मेरा जन्मदिन अलग से मनाए जाने की बजाय अगर शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो इससे बड़े सम्मान की बात मेरे लिए नहीं हो सकती।

 

 

इसी के बाद से तब से लेकर अब तक देशभर में 5 सितंबर शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। देश में शिक्षक दिवस पहली बार 5 सितंबर 1962 को मनाया गया था। शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया जाता है।

 

 

डॉ. राधाकृष्णन का निधन 17 अप्रैल, 1975 को हो गया, लेकिन एक आदर्श शिक्षक और दार्शनिक के रूप में वह आज भी सभी के लिए प्रेरणादायक हैं।


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement