दिवाली से पहले यहां की जाती है कुत्तों की पूजा, महाभारत काल से है इसका संबंध

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Updated on 20 Oct, 2017 at 5:33 pm

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हमारे पड़ोसी देश नेपाल में दिवाली के अवसर पर कुत्तों की पूजा की जाती है। हिंदू परंपरा के मुताबिक,  नेपाल में हर साल अक्टूबर के महीने में पांच दिवसीय ‘तिहार पर्व’ मनाया जाता है। हिंदू समुदाय के लोग पांच दिन के इस त्यौहार में कई जानवरों की पूजा करते हैं।

पांच दिन तक चलने वाले इस त्यौहार के पहले दिन कौए की पूजा की जाती है, जिसे यमराज का दूत माना गया है।  इस दिन लोग सभी दुखों के विनाश की कामना लिए कौए को खाना देते हैं, जबकि दूसरे दिन कुत्ते की पूजा की जाती है।इसमें कुत्तों को लाल रंग का तिलक कर, उन्हें फूलों की माला पहनाई जाती है। खाने के लिए विभिन्न प्रकार की स्वादिष्ट मिठाईयां परोसी जाती हैं। दिवाली के अवसर पर मनाए जाने वाले इस त्यौहार को ‘कुकुर तिहार’ या कुत्तों का त्यौहार कहा जाता है।

तीसरे दिन गाय को देवी लक्ष्मी और चौथे दिन शक्ति के देवता के रूप में बैल को पूजा जाता है। पर्व का आखिरी दिन बहनें अपने भाईयों के सम्मान में मनाती है।

नेपाली हिंदुओं का यह त्यौहार धरती पर रह रहे सभी प्राणियों के परस्पर संबंधों को बनाये रखने का सन्देश देता है। वैसे भी, सभ्यता के प्रारंभ से इंसान और जानवरों के बीच की दोस्ती को सबसे खास माना गया है।

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इन 5 दिनों में से दूसरे दिन का विशेष महत्व है, जिसमें कुत्ते का पूजन किया जाता है। नेपाल में मनाए जाने वाले इस त्यौहार का सम्बन्ध पौराणिक कथा से जुड़ा है।



ऋग्वेद में, कुत्तों की मां के रूप में प्रचलित सरामा नाम की कुतिया ने भगवान इंद्र की चोरी की दिव्य गायों को पुनः प्राप्त करने में सहायता की थी। महाभारत में भी कुत्ते का वर्णन किया गया है। युधिष्ठिर अपनी स्वर्ग की यात्रा के दौरान अपने परमभक्त कुत्ते के बिना स्वर्ग जाने से मना कर देते हैं।

युधिष्ठिर कहते हैं कि “यह कुत्ता मेरा परमभक्त है। इसलिए इसे भी मेरे साथ स्वर्ग जाने की आज्ञा दीजिए”, लेकिन इंद्र ने ऐसा करने से मना कर दिया। काफी देर समझाने पर भी जब युधिष्ठिर बिना कुत्ते के स्वर्ग जाने के लिए नहीं माने तो कुत्ते के रूप में यमराज अपने वास्तविक स्वरूप में आ गए (वह कुत्ता वास्तव में यमराज ही थे)।

युधिष्ठिर को अपने धर्म में स्थित देखकर यमराज बहुत प्रसन्न हुए। इसके बाद देवराज इंद्र युधिष्ठिर को अपने रथ में बैठाकर स्वर्ग ले गए। कुत्तों को बफादारी और धर्म के मार्ग पर चलने का प्रतीक माना जाता है।


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