Topyaps Logo

Topyaps Logo Topyaps Logo Topyaps Logo Topyaps Logo

Topyaps menu

Responsive image

इस डॉक्टर ने सूखे के इलाज के लिए अपने गांव में बनवा दिए 11 डैम

Updated on 20 December, 2016 at 7:41 pm By

हर साल देश में सूखे की चपेट में आकर न जाने कितने ही किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। इस वजह से या तो उन्हें शहर की तरफ पलायन करना पड़ता है या फिर सूदखोरों के भारी क़र्ज़ को झेलना पड़ता है। ऐसे में अपने किसान मरीज़ों को इस विकट स्थिति से बाहर निकालने के लिए पेशे से आयुर्वेदिक डॉक्टर ने जो कदम उठाया है, वह न केवल सराहनीय है, बल्कि प्रेरणादायक भी है।

आयुर्वेदिक डॉक्टर अनिल जोशी ने अपने अच्छे-भले चलते पेशे को छोड़कर जल सरंक्षणवादी बनने का फ़ैसला लिया। उनका मकसद सूखे खेतों में पुनः हरियाली लाना था।

thebetterindia

प्रतिनिधित्व छवि। thebetterindia

एक आयुर्वेदिक डॉक्टर से जल सरंक्षणवादी बनाने की प्रेरणादायक कहानी।


Advertisement

1998 में डॉ अनिल जोशी की तैनाती मध्य प्रदेश के फतेहगढ़ में हुई थी। चिकित्सा सेवा के दौरान वे कई ऐसे किसान मरीज़ों से मिले, जिनके पास स्वयम् की ज़मीनें तो थीं, लेकिन फीस देने भर के पैसे नहीं होते थे। बाद में जब उनको यह पता चला की किसानो की इस दुर्दशा का कारण सूखा है, तो डॉ अनिल जोशी ने अपने मरीजों की मदद करने का बीड़ा उठाया और 10 किमी की परिधि में बांधों का निर्माण करा दिया।

डॉ अनिल जोशी ने देखा कि जलस्तर काफ़ी नीचे और मौसम की मार सूखे की वजह से किसानों की सारी मेहनत बर्बाद हो जाती थी, जिस वजह से किसानों की स्थिति दयनीय हो जाती थी। ऐसे में 2008 में मानसून नहीं आया और डॉ अनिल ने देखा कि किसान सूखे से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसके बाद उन्होंने गांव वालों को चेक बांध बनाने का सुझाव दिया।

परिवार संग डॉ अनिल जोशी theweekendleader

परिवार संग डॉ अनिल जोशी theweekendleader

इस अभियान का पहल करते हुए डॉ अनिल ने अपने एक मित्र से 1000 सीमेंट की बोरियां लीं और उन्हें बालू से भरकर सोमाली नदी के किनारों पर रखकर बांध बना दिया। जब 15 दिन बाद बारिश हुई तो बांध पानी से लबालब भर गया और सालों से सूखे पड़े हैंडपम्प पानी देना शुरू हो गए। जमीन का जलस्तर अब पानी देने तक बढ़ गया था। डॉ अनिल द वीकेंड लीडर को बताते हैंछ 

“किसानों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। उस बरस खेतों को पर्याप्त पानी मिला। और कई सालों के सूखे के बाद उस साल वे खेतों से अनाज घर लेकर आए ।”

कभी डॉ अनिल के इस अभियान पर कई ग्रामीणों ने उठाये थे सवाल, अब कंधे से कन्धा मिलाकर खड़े हैं साथ।

डॉ अनिल के इस अथक प्रयास मे शुरुआती सफलता के बाद उन्होंने पाया कि अब गरीब किसानों की स्थिति बेहतर होने लगी है। यह बदलाव देख कर उन्होंने कई बांध बनाने का निश्चय किया। इसके लिए उन्होंने एक अभियान के तौर पर 2010 में हर ग्रामीण से एक रुपया लेना शुरू किया।



हालांकि, शुरुआत में डॉ अनिल के लिए चंदा इकट्ठा करना काफ़ी मुश्किल रहा। यहां तक इस अभियान पर कई ग्रामीणों ने सवाल भी खड़े कर दिए। पहले  दिन सिर्फ़ 120 लोगों ने एक-एक रुपए का चन्दा दिया, लेकिन डॉ अनिल के इस रुपए इकट्ठा के अभियान में कभी मायूस नहीं हुए।


Advertisement

इस अभियान में गांव वालों का समर्थन तब मिला, जब एक हिंदी अख़बार ने इस अभियान के समर्पण और इरादों से संबंधित खबर छापी। इसके बाद दो अध्यापक सुन्दरलाल प्रजापत और ओमप्रकाश मेहता इस जल सरंक्षण के अभियान में डॉ अनिल के साथ जुड़ गए। 

डॉ अनिल जोशी के चैक डैम के बदौलत क्षेत्र में भूजल स्तर में काफ़ी सुधार हुआ है theweekendleader

डॉ अनिल जोशी के चैक डैम के बदौलत क्षेत्र में भूजल स्तर में काफ़ी सुधार हुआ है theweekendleader

अभियान में ग्रामीणों का समर्थन मिलने के बाद डॉ जोशी ने अब तक 11 बांध बनवा डाले हैं। अब उनका इरादा इस तरह के पक्के बांधों की संख्या 100 तक पहुंचाने का है।

तीन महीने में डॉ अनिल की टीम ने 1 लाख रुपयों का सहयोग इकठ्ठा कर लिया और अब जल सरंक्षण के लिए समर्पित इस ग्रुप ने एक स्थाई चेक बांध का निर्माण शुरू कर दिया। गांव वालों ने श्रमदान किया, ताकि मजदूरी का खर्च बच सके सबके सहयोग से बांध बनाने का कुल खर्च 92 हज़ार रुपए आया। अनिल इस अभियान के सफलता के बाद अपने इरादे स्पष्ट करते हुए कहते हैंः

“हर व्यक्ति से एक-एक रुपया इकट्ठा कर सूखाग्रस्त क्षेत्र में बांध बनाना अब मेरा अभियान बन गया है। और मैं इस अभियान को जारी रखूंगा।”

अनिल इस अभियान के साथ इस क्षेत्र में धार्मिक आस्था का केंद्र रहे सवालिया धाम को भी एक अलग पहचान देना चाहते हैं। अनिल इलाके के प्रसिद्ध मंदिर सवालिया धाम तक जाने वाली 120 किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों किनारों पर पेड़ लगाना चाहते हैं, ताकि कृष्ण मंदिर तक पैदल जाने वाले तीर्थ यात्रियों को पेड़ की छांव मिल सके।


Advertisement

साभार: द वीकेंड लीडर

Advertisement

नई कहानियां

नेहा कक्कड़ के ये बेहतरीन गाने हर मूड को सूट करते हैं

नेहा कक्कड़ के ये बेहतरीन गाने हर मूड को सूट करते हैं


मलिंगा के इस नो बॉल को लेकर ट्विटर पर बवाल, अंपायर से हुई गलती से बड़ी मिस्टेक

मलिंगा के इस नो बॉल को लेकर ट्विटर पर बवाल, अंपायर से हुई गलती से बड़ी मिस्टेक


PUBG पर लगाम लगाने की तैयारी, सिर्फ़ इतने घंटे ही खेल पाएंगे ये गेम!

PUBG पर लगाम लगाने की तैयारी, सिर्फ़ इतने घंटे ही खेल पाएंगे ये गेम!


अश्विन-बटलर विवाद पर राहुल द्रविड़ ने अपना बयान दिया है, क्या आप उनसे सहमत हैं?

अश्विन-बटलर विवाद पर राहुल द्रविड़ ने अपना बयान दिया है, क्या आप उनसे सहमत हैं?


आधार कार्ड कैसे होता है डाउनलोड? यहां जानें इसका आसान प्रोसेस

आधार कार्ड कैसे होता है डाउनलोड? यहां जानें इसका आसान प्रोसेस


Advertisement

ज़्यादा खोजी गई

टॉप पोस्ट

और पढ़ें Culture

नेट पर पॉप्युलर