आखिर 15 अगस्त को ही क्यों आजाद हुआ भारत?

Updated on 15 Aug, 2018 at 3:17 pm

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हम सब 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि 1929 में लाहौर अधिवेशन के समय 26 जनवरी को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से आजादी के दिन के रूप में चुना गया था। फिर 1930 से भारत की आजादी तक भारत इसी दिन स्वतंत्रता दिवस मनाता रहा था।

 

अब आप सोच रहे होंगे तो आखिर 15 अगस्त को ही भारत आजाद क्यों हुआ?

 

 

दरअसल, भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड लुईस माउंटबेटन को ब्रिटिश संसद ने 30 जून 1948 तक भारत में सत्ता-हस्तांतरण का दायित्व सौंपा था। सी राजगोपालचारी के अमर शब्दों में कहें तो अगर माउंटबेटन ने 30 जून 1948 तक इंतजार किया होता तो उनके पास हस्तांतरित करने के लिए कोई सत्ता नहीं बचती। इसलिए माउंटबेटन ने अगस्त 1947 में ही ये दायित्व पूरा कर दिया।

 


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माउंटबेटन की भेजी सूचनाओं के आधार पर ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमंस में इंडियन इंडिपेंडेंस बिल चार जुलाई 1947 को पेश किया गया। भारत को आजादी देने वाला ये विधेयक एक पखवाड़े में ही ब्रिटिश संसद में पारित हो गया। इस विधेयक के अनुसार 15 अगस्त 1947 को भारत में ब्रिटिश राज समाप्त होना तय हुआ।

 

विधेयक के अनुसार इसके बाद भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र-उपनिवेश बनने तय हुए जिन्होंने ब्रिटिश कॉमनवेल्थ के तहत रहना स्वीकार किया।

 

ब्रिटिश हुकूमत ने भारत की 500 से ज्यादा रियासतों का भविष्य भी नए देशों पर छोड़ दिया था। इन रियासतों को भारत और पाकिस्तान में से किसी एक को चुनना था। कई रियासतें 15 अगस्त 1947 से पहले ही भारत या पाकिस्तान का हिस्सा बन गई थीं, लेकिन कुछ रियासतें आजादी के बाद तक दोनों में से किसी देश में शामिल नहीं हुई थीं।

इस तरह देश 15 अगस्त को आज़ाद हो गया और हम हर साल इसी दिन आज़ादी का जश्न मनाते हैं।

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