ये DM किसी बड़े हॉस्पिटल जा सकता था, इस एक वजह से कराई सरकारी अस्पताल में पत्नी की डिलीवरी

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Updated on 13 Nov, 2018 at 4:04 pm

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देश के सरकारी अस्पातलों को लेकर लोगों की क्या सोच है ये हम सब जानते हैं। सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं अपने लचीलेपन की वजह से हमेशा से सवालों के घेरे में रही हैं। चाहे सरकारें कितना भी बदलाव की बात कर लें लेकिन सरकारी अस्पतालों को लेकर लोगों की सोच को एकदम से बदलना थोड़ा मुश्किल है। लेकिन अगर पहल की जाए तो कुछ भी नामुमकिन नहीं।

 

 


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उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने अपनी पत्नी की डिलीवरी सरकारी अस्पताल में करवा कर एक उदाहरण सामने रखा है।

 

10 अक्टूबर की सुबह जब डीएम की पत्‍‌नी अंकिता राज को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, तब डीएम ने अपनी पत्नी से जिले के सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने को कहा, जिसके लिए वो तैयार हो गई। उन्हें तुरंत जिले के सरकारी अस्पताल में ले जाया गया जहां उन्होंने बेटी को जन्म दिया।

 

 

डीएम मनीष कुमार वर्मा ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ये कदम उठाया। डीएम वर्मा का मानना है सरकारी अस्पतालों में भी बेहतर सुविधाएं हैं। बावजूद इसके लोग प्राइवेट अस्पतालों की ओर भागते हैं।

 

ऐसा करने के पीछे का उनका मकसद है लोग सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत ही प्रसव कराएं जिससे वो इस योजना का लाभ ले सकें।

 

सरकारी अस्पताल में बच्ची के जन्म के लिए मां अंकिता को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत पांच हजार रुपये मिले। डीएम ने कहा कि उन्होंने ऐसा पैसों के लिए नहीं, बल्कि लोगों को इस योजना के प्रति जागरुक करने के लिए किया है।

डीएम ने जानकारी देते हुए बताया प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पांच हजार रुपए मिलते हैं। इसके लिए आशा से पंजीयन कराना होता है। पंजीयन के बाद एक हजार, आठवें माह में 2000 व बच्चा होने के 48 घंटे के बाद ₹2000 मिलते है। इससे मां बच्चे के पोषण में आर्थिक मदद हो जाती है। लोगों को इसका लाभ उठाना चाहिए।


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