Topyaps Logo

Topyaps Logo Topyaps Logo Topyaps Logo Topyaps Logo

Topyaps menu

Responsive image

महान गणितज्ञ आर्यभट्ट ने किया था पाई (π) के सिद्धान्त की खोज

Updated on 11 July, 2016 at 4:19 pm By

जब यूरोप के लोग गणित का ककहरा सीख रहे थे, तब महान भारतीय गणितज्ञ आर्यभट्ट पाई की जटिल पहेली को सुलझा रहे थे। गणित में दशमलव पद्धति का अविष्कार करने वाले और दुनिया को शून्य से अवगत कराने वाले आर्यभट्ट ने ही पाई के  सिद्धान्त का प्रतिपादन भी किया था।


Advertisement

यही नहीं, गणित के जटिल प्रश्नों को सरलता से हल करने के लिए उन्होंने समीकरणों का आविष्कार किया, जिनका उपयोग दुनिया भर में लोग आज भी करते हैं। आइए जानते हैं पाई के बारे में कुछ रोचक बातें।

1. पाई क्या है?

ज्यामिती में किसी वृत्त की परिधि की लंबाई और व्यास की लंबाई के अनुपात को पाई कहा जाता है। प्रत्येक वृत्त में यह अनुपात 3.141 होता है, लेकिन दशमलव के बाद की पूरी संख्या का अब तक आंकलन नहीं किया जा सका है, इसलिए इसे अनंत माना जाता है। आर्यभट्ट ने इसके सिद्धान्त का प्रतिपादन करते हुए संस्कृत में लिखा है।

चतुराधिकं शतमष्टगुणं द्वाषष्टिस्तथा सहस्त्राणाम्।
अयुतद्वयस्य विष्कम्भस्य आसन्नौ वृत्तपरिणाहः॥

100 में चार जोड़ें, आठ से गुणा करें और फिर 62,000 जोड़ें। इस नियम से 20,000 परिधि के एक वृत्त का व्यास ज्ञात किया जा सकता है।



अर्थात्‌ एक वृत्त का व्यास यदि 20,000 हो, तो उसकी परिधि 62,232 होगी।

उल्लेखनीय है कि चार दशमलव स्थानों पर सटीक और सही गणना के बावजूद सत्य के प्रति आग्रही आर्यभट्ट इस मान को विशुद्ध नहीं मानते बल्कि आसन्न (निकट) मानते थे।

2. पाई का उपयोग


Advertisement

पाई का अधिकतर उपयोग ज्यामिति में होता है। अंको को रेडियन में लिखने परंपरा ने इसे त्रिकोणमिति का भी अभिन्न अंग बना दिया। अनुमान या संभावना में भी खूब इस्तेमाल होता है इसका सबसे बड़ा उदहारण बफ़ौन की सुई (Buffon’s Needle problem) सवाल है। इसका उपयोग गणित की लगभग हर शाखा में होता है। साथ ही विज्ञान और अभियांत्रिकी में भी इस संख्या का उपयोग होता है।

3. पाई का शुरूआती इतिहास

यह निर्विवाद सत्य है कि पाई के सिद्धान्त के प्रतिपादक आर्यभट्ट थे। इसके बावजूद आर्कीमीडिज से लेकर न्यूटन तक, सबने पाई के बारे में खोज कर अपने-अपने मान दुनिया के सामने रखे थे। भारत के एक अन्य गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त भी पाई की खोज को एक नई ऊंचाई तक ले गए। माना जाता है कि मिस्र के पिरामिड का निर्माण करने वालों को पाई का ज्ञान था। हालांकि इसका कोई लिखित प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

4. आर्किमिडीज़ की खोज

आर्किमिडीज़ ने बताया की पाई 223/71 और 22/7 के बीच में होता है। आर्किमिडीज़ को अक्सर यांत्रिक उपकरणों का डिजाइनर कहा जाता है, लेकिन गणित के क्षेत्र में भी उनका योगदान अतुलनीय है। आर्किमिडीज़ अपरिमित श्रृंखलाओं का उपयोग उसी तरीके से कर सकते थे जैसे कि आधुनिक अविभाज्य गणना में किया जाता है। उन्होंने अपनी ‘तकनीक पूर्णता की विधि’ का प्रयोग पाई के सन्निकट मान का पता लगाने में किया।

5. पाई की गणना


Advertisement

प्राचीन भारत के इतिहास में पाई की गणना के कई उदाहरण मिलते हैं। गणना के आधार पर विविध आकार-प्रकार की यज्ञ-वेदियां बनाई जाती थीं। आर्यभट्ट ने कुछ कठिन प्रश्नों को सुलझाया था। जैसे, दो समकोण समभुज चौकोन के क्षेत्रफलों का योग करने पर जो संख्या आएगी, उतने क्षेत्रफल का ‘समकोण’ समभुज चौकोन बनाना और उस आकृति का उसके क्षेत्रफल के समान के वृत्त में परिवर्तन करना। आदि।

Advertisement

नई कहानियां

धोनी ने 6 भाषाओं में बेटी से पूछे सवाल, जीवा के क्यूट जवाब इंटरनेट पर वायरल

धोनी ने 6 भाषाओं में बेटी से पूछे सवाल, जीवा के क्यूट जवाब इंटरनेट पर वायरल


दीपिका पादुकोण ने शेयर किया ‘छपाक’ का पहला लुक, तारीफ़ करते नहीं थक रहे लोग

दीपिका पादुकोण ने शेयर किया ‘छपाक’ का पहला लुक, तारीफ़ करते नहीं थक रहे लोग


PAN कार्ड के लिए ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन, फ़ॉलो करें ये आसान स्टेप्स

PAN कार्ड के लिए ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन, फ़ॉलो करें ये आसान स्टेप्स


रंगोली के इन डिज़ाइनों में दिखती है देश की संस्कृति की झलक, आसानी से बना सकते हैं आप

रंगोली के इन डिज़ाइनों में दिखती है देश की संस्कृति की झलक, आसानी से बना सकते हैं आप


जामिनी रॉय: एक ऐसा महान चित्रकार, जिन्होंने चित्रकारी को दिया नया आयाम

जामिनी रॉय: एक ऐसा महान चित्रकार, जिन्होंने चित्रकारी को दिया नया आयाम


Advertisement

ज़्यादा खोजी गई

और पढ़ें Education

नेट पर पॉप्युलर