इस दिव्यांग लड़की ने पैरों से लिखकर दी दसवीं बोर्ड की परीक्षा, बनी युवाओं के लिए प्रेरणा

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Updated on 10 Mar, 2017 at 10:01 pm

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कहते हैं जहां हौसले बुलंद हो वहां कोई भी कठिनाई टिक नहीं सकती। बिहार के सारण जिले की रहने वाली अंकिता कुमारी ने एक ऐसी मिसाल कायम की है जो कई युवाओं के लिए प्रेरणा है।

अंकिता बोल नहीं सकती और न ही उनके हाथ काम कर सकने में सक्षम हैं, लेकिन पढ़ने की ललक ऐसी कि उन्होंने अपनी कमजोरियों से लड़कर दसवीं के बोर्ड की परीक्षा पैरों से लिखकर दी है।


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अंकिता पहले ऐसी नहीं थी। अंकिता 5 साल की उम्र में पोलियो का शिकार हो गईं थी। इस बिमारी के कारण उसके दोनों हाथों ने काम करना बंद कर दिया और बाद में आवाज भी चली गई। अंकिता के माता-पिता अपनी बेटी के इलाज के लिए कई अस्पतालों में गए, लेकिन कहीं भी वह सही नहीं हुई।

अंकिता जैसे-जैसे बड़ी होती रही उसकी पढाई में रूचि बढ़ती गई। माता-पिता ने भी अंकिता की पढ़ाई में लगन देखकर उसका सहयोग करना शुरू कर दिया। अंकिता की शिक्षिका रूपा कुमारी बताती हैं कि अंकिता जमीन पर बैठकर पैर से आसानी से लिख लेती हैं। उसका जज्बा इतना मजबूत है कि वह जरूर एक दिन कुछ अच्छा कर दिखाएगी।

आज अंकिता ऐसे लोगों के लिए एक मिसाल है जो अपने जीवन में सफलता के लिए संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं।

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