दीर्घेश्वरनाथ मंदिर में आज भी अश्वत्थामा करते है पूजा-अर्चना!

Updated on 30 Oct, 2017 at 9:02 am

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गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा भगवान शिव के अंश हैं और चिरायु भी हैं। बताया जाता है कि वे आज भी उत्तर प्रदेश में स्थित दीर्घेश्वरनाथ मंदिर में पूजा अर्चना करने आते हैं।

यह पौराणिक मंदिर स्थित है देवरिया जिले के मझौलीराज के निकट हिरण्यावती नदी के तट पर। कहा जाता है कि अश्वत्थामा यहां नित्य पूजा करने आते हैं, लेकिन उन्हें कोई देख नहीं पाता। मंदिर के महंत जगन्नाथ दास के अनुसार चिरंजीवी अश्वत्थामा मस्तक के घाव के कारण आज भी तड़पते और इधर-उधर भटकते हैं।

स्थानीय लोग मानते हैं कि अश्वत्थामा इस मंदिर में रात के तीसरे पहर में आते हैं। सुबह जब मंदिर का द्वार खोला जाता है तो यहां पर सारी पूजन-सामग्री शिवलिंग पर चढ़ी मिलती है।


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भगवान शिव भक्तों को दीर्घायु बनाते हैं फलतः इस मंदिर को दीर्घेश्वरनाथ महादेव मंदिर कहा जाता है। दीर्घेश्वरनाथ महादेव में लोगों की बहुत आस्था है। पूरे साल यहां भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है। अधिमास में यहां मेला लगता है तो सावन के महीने में बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। मान्यता है कि यहां शिवलिंग स्वयंभू है। जो भी भक्त सच्चे मन से आराधना करते हैं, दीर्घेश्वरनाथ उनकी सभी मनोकामना पूरी करते हैं और दीर्घायु बनाते हैं।

साथ ही इस मंदिर को महाभारत काल के चिरंजीवी अश्वत्थामा की तपस्थली के रूप में जाना जाता है। ज्ञात हो कि पुराण के अनुसार अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और भगवान परशुराम ये सभी सात महामानव हजारो सालों से जीवित हैं।

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