सौरमंडल के दो ग्रहों पर होती है हीरे का बारिश, यह सपना नहीं सच है

Updated on 24 Aug, 2017 at 4:28 pm

Advertisement

बारिश… वो भी हीरों की। सुनकर आपको किसी सपने जैसे लगा ही होगा। हालांकि, वैज्ञानिकों का दावा है कि ये सपना नहीं, बल्कि हकीकत है। उनके मुताबिक सौर मंडल के दो ग्रहों पर हीरे की बारिश होती है।

एक नई रिसर्च के मुताबिक, सौर मंडल के ग्रह नेप्च्यून और यूरेनस में हीरे बारिश होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन दोनों ग्रहों के अंदरूनी भाग में बहुत अधिक दबाव होता है, जिसकी वजह से हाइड्रोजन और कार्बन के बॉन्ड टूट जाते हैं। इसी वजह से हीरों की बरसात होती है। नेप्चयून पृथ्वी से 17 गुणा और यूरेनस 15 गुणा बड़ा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले हज़ार सालों से ये हीरे धीरे-धीरे इन ग्रहों की बर्फ़ीली सतह पर जमा हो रहे थे। इन दोनों ग्रहों की संरचना पृ्थ्वी से काफी अलग है। इन ग्रहों पर हाइड्रोजन और हीलियम जैसी गैसों का दबदबा है। वैज्ञानिकों का मानना था कि इन ग्रहों के भीतरी भाग में यानी ज़मीन से लगभग 6200 मील अंदर अत्यधिक दबाव होता है। हीरे की बारिश होने की वजह भी यही है। हाल ही में एक प्रयोग ने इन ग्रहों पर हीरे की बारिश होने की पुष्टि भी की है।



वैज्ञानिकों की टीम ने इस प्रयोग के लिए Polystyrene को चुना। ये एक प्रकार का प्लास्टिक है और ये कार्बन और हाइड्रोजन से बनता है। इसके बाद एक लेज़र की मदद से Polystyrene को उतना दबाव दिया गया, जितना आमतौर पर इन ग्रहों के अंदरूनी हिस्सों में पाया जाता है। 9000 F तापमान और 150 Giga Pascal के दबाव में रखने के बाद कार्बन और हाइड्रोजन के बीच बॉन्ड टूट गया और कार्बन के एटम नैनो डायमंड में बदल गए।

हालांकि, लैब में ये डायमंड्स दिखने में महज़ कुछ नैनोमीटर ही थे, लेकिन इस रिसर्च से जुड़ी टीम का कहना था कि नेप्च्यून और यूरेनस में इन हीरों का साइज़ बड़ा हो सकता है। हीरे के बनने की प्रक्रिया भी महज़ चंद सेकंड्स के लिए ही थी, लेकिन इस प्रयोग से इन ग्रहों पर होने वाली हीरों की बारिश के बारे में पुष्टि हो सकी है।


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement