धोनी के कप्तानी छोड़ने की कहानी, जानिए उन 12 घंटों में क्या हुआ जो लिया इतना बड़ा फैसला

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Updated on 5 Jan, 2017 at 5:24 pm

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संकट की घड़ी में भी मैदान पर एकदम कूल रहने वाले एमएस धोनी की ‘कूल कप्तानी’ अब हमें देखने को नहीं मिलेगी। धोनी ने टीम इंडिया की वनडे और टी-20 कप्तानी से इस्तीफा दे दिया है। धोनी ने अपनी कप्तानी में टीम इंडिया को नई ऊंचाइयां दीं और आईसीसी का ऐसा कोई भी टूर्नामेंट नहीं रहा, जिसे उन्होंने टीम को न दिलाया हो। बल्कि ऐसा करने वाले वह दुनिया के पहले कप्तान भी हैं।

2007 वर्ल्ड टी-20 के फ़ाइनल में आख़िरी ओवर जोगिंदर शर्मा से करवाना हो, चाहें 2011 वर्ल्ड कप में युवराज को रेगुलर गेंदबाज़ की तरह इस्तेमाल करना हो, धुन के धोनी कभी कोई दाव खेलने से नही घबराए। 2007 के वर्ल्ड टी-20 के आखिर में लीग राउंड में जब पाकिस्तान के खिलाफ टीम इंडिया का मैच अप्रत्याशित रूप से टाई हो गया और फैसला बॉल आउट से हुआ, तो मैच के इस तनाव वाले क्षण में सिर्फ़ धोनी ही वीरेंद्र सहवाग और रॉबिन उथप्पा जैसे पार्ट टाइम गेंदबाज़़ों पर दांव खेल सकते थे। वहीं 2011 के वर्ल्ड कप फ़ाइनल में कुलशेखरा की गेंद पर धोनी का जीत दिलाने वाला छक्का कौन भूल सकता है? जीत को इस तरह से यादगार बनाने का फ़ैसला भला धोनी के अलावा और कौन ले सकता था।

रांची की गलियों से निकलकर क्रिकेट वर्ल्ड पर छाने वाला ये खिलाड़ी जितना खास है उतना ही आम भी। हर बार की तरह धोनी का ये फैसला भी चौंकाने वाला रहा। इस बार फ़र्क बस इतना है कि ‘बेहद कूल’ अंदाज़ में बेमिसाल कप्तानी देखने को नही मिलेगी

धोनी ने कप्तानी छोड़ने का फ़ैसला तब लिया जब इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के लिए वनडे और टी-20 टीम चुनी जानी थी। खेल के मैदान में अपने फ़ैसलों से सबको चौकाने वाले धोनी ने अपने करियर को लेकर लिया गया यह फ़ैसला भी चौंकाने वाला था।

धोनी को बीसीसीआई प्रमुख के तौर पर अनुराग ठाकुर को हटाए जाने और उन पर बढ़ने वाले प्रेशर का था अंदाज़ा।

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क्रिकेट ग्राउंड में परिस्थिति का सटीक अंदाजा लगाने में माहिर धोनी को इसका अहसास दो सप्ताह पहले ही लग चुका था। उन्होंने बीसीसीआई प्रमुख के तौर पर अनुराग ठाकुर को हटाए जाने का अंदाजा लगा लिया था। ऐसे में अनुराग ठाकुर की जगह सौरव गांगुली या फिर किसी और के आने से सबसे पहला बदलाव कप्तानी का होता। आपको बता दें गांगुली सहित कई दिग्गज विराट कोहली को सभी फॉर्मेट में कप्तान बनाने के पक्ष में हैं। ऐसे में धोनी ने खुद ही रास्ता चुनना बेहतर समझा।

सेलेक्टर एमके प्रसाद से घंटों चली मीटिंग

सूत्रों की मानें तो यह निर्णय लेने से पहले धोनी नागपुर में ही सेलेक्टर एमके प्रसाद के साथ थे। जहां झारखंड और गुजरात के बीच रणजी का सेमीफाइनल मुकाबला हो रहा था। खबर के अनुसार बुधवार को नागपुर के वीसीए सिविल लाइंस स्टेडियम में धोनी की प्रसाद के साथ घंटों बैठक हुई। खबर के अनुसार उन्होंने सेलेक्टर को कप्तानी छोड़ेने के फ़ैसले से पहले ही अवगत करा दिया था।



कप्तानी छोड़ने से पहले नेट प्रैक्टिस करते नजर आए धोनी, लगाए लंबे-लंबे छक्के

बता दें कि धोनी की कप्तानी छोड़ने की विज्ञप्ति से कुछ समय पहले ही बीसीसीआई ने इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली वनडे और टी-20 सीरीज के लिए टीम का ऐलान 6 जनवरी को करने की विज्ञप्ति जारी की थी। धोनी कप्तानी छोड़ने से पहले नेट प्रैक्टिस करते भी नजर आए। इतना ही नहीं उन्होने अपनी ही शैली में झारखंड टीम के सभी गेंदबाज़ों की जाम के धुनाई की और लंबे-लंबे शॉट लगाए।

मौके पर मौजूद शख्स की मानें तो धोनी हमेशा की तरह कूल थे और टीम से बातचीत कर रहे थे। लगभग 6 बजे वे होटल लौटे। होटल सूत्रों के मुताबिक, वे आते ही रूम में चले गए। उसके बाद उन्हें किसी ने बाहर नहीं देखा। हालांकि, कप्तानी छोड़ने के बाद झारखंड टीम से जरूर मिले।

महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी के दौरान ऐसे कई मौके आए जब उन्होंने लीक से हटकर फैसले लेकर विशेषज्ञों और प्रशंसकों को हैरान किया। उनके फैसले की आलोचना भी हुई। ज्यादातर बार वह सही साबित हुए, लेकिन कुछ बार दांव उल्टे भी पड़े। फिर भी समग्र रूप से देखा जाए, तो क्रिकेट के मैदान पर ऐसे फैसले लेने के लिए जुदा सोच और साहस की जरूरत होती है, जो धोनी जैसा महारथी ही कर सकता था।


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