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देव साहब का पहला प्यार रह गया था अधूरा, वो अभिनेत्री भी ताउम्र कुंवारी रही

Published on 3 December, 2018 at 1:58 pm By

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ज़िंदादिल, सदाबहार और लाखों दिलों पर राज करने वाले देव आनंद एक ऐसे अभिनेता थे जिनकी याद आज भी लोगों के ज़हन में ज़िंदा हैं। अपने मस्तमौला अंदाज़ की वजह से वो हमेशा दर्शकों के चहेते बने रहें। उनकी पर्सनालिटी ऐसी थी लड़कियां उन्हें देख बेहोश हो जाया करती थीं। आज देव साहब की पुण्यतिथी है, चलिए इस मौके पर आपको बताते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें।

26 सितंबर 1923 को पंजाब के शकरगढ़ (अब पकिस्तान) में जन्में देव आनंद का असली नाम धर्मदेव आनंद था। देव साहब 22 साल की उम्र में किस्तम आज़माने मुंबई आए और मुंबई ने उन्हें हिंदी सिनेमा का सुपरस्टार बना दिया। उनके बारे में कहा जाता है ब्लैक कलर के कोट में वो इतने हैंडसम लगते थे लड़कियां उनपर मर मिटती थीं। फ़िल्म ‘काला पानी’ में उन्हें काले रंग का कोट नहीं पहनने दिया गया, क्योंकि डर था कहीं हैंडसम देव आनंद को देखकर लड़कियां कहीं छत से न कूद जाएं। किसी और हीरो को लेकर आपने ऐसी दीवानगी कहीं नहीं देखी होगी।

 


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वो देव आनंद ही थे जो व्हाइट शर्ट और ब्लैक कोट के ट्रेंड में लेकर आए। लोग इसे जमकर कॉपी करने लगे। आलम तो ये था देव आनंद साहब ब्लैक कोट में इतने हैंडसम लगते थे कि पब्लिक जगहों पर कोर्ट ने उनके काला कोट पहनने पर बैन तक लगा दिया गया।

इसकी वजह बेहद दिलचस्प थी। उस दौर में लड़कियों में देव आनंद साहब को लेकर बड़ा क्रश हुआ करता था। कुछ लड़कियों के उनके काले कोट पहनने के दौरान आत्महत्या की घटनाएं सामने आईं। ऐसा शायद ही कोई एक्टर हो जिसके लिए इस हद तक दीवानगी देखी गई और कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा।

 

 



बात करें देव साहब के करियर की तो उन्होंने हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर एक फ़िल्में दी हैं। देवानंद का करियर ग्राफ बहुत ऊपर गया, लेकिन उनका पहला प्यार अधूरा रह गया। फिल्म ‘विद्या’ (1948) की शूटिंग के दौरान देव साहब को अभिनेत्री सुरैया से प्यार हो गया और दोनों शादी भी करना चाहते थे, लेकिन प्रेम कहानी में सुरैया की नानी विलेन बन गईं। वो देव आनंद और सुरैया की शादी के सख्त खिलाफ़ थीं, अफ़सोस नानी की ज़िद की वजह से देव साहब की प्रेम कहानी अधूरी ही रह गई और सुरैया ने सारी ज़िंदगी किसी और से शादी नहीं की।

वक्त बीतता गया और देव आनंद की ज़िंदगी में कल्पना कार्तिक आईं। साथ फ़िल्में करते-करते कब उनके दिल मिल गए पता नहीं चला और आखिरकार दोनों ने शादी कर ली। देव साहब ऐसे सुपरस्टार रहे, जिन्होंने अमिताभ को छोड़कर उस वक्त के सभी एक्टर्स के साथ काम किया। कम ही लोग ये बात जानते हैं जिस फ़िल्म से अमिताभ सुपरस्टार बने उस फ़िल्म के लिए निर्माताओं की पहली पसंद देव साहब ही थे।

 

 

देव आनंद न सिर्फ़ बेहतरीन अभिनेता, बल्कि एक जागरुक नागरिक भी थे। जून 1975 में जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लागू की थी तो देव आनंद ने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर इसका जमकर विरोध किया था। देव साहब ने नेशनल पार्टी ऑफ़ इंडिया के नाम से एक राजनीतिक पार्टी भी बनाई थी, लेकिन कुछ समय बाद उसे भंग कर दिया गया, क्योंकि उनका मन राजनीति में नहीं लगा।

 

 

देव आनंद की नज़र बहुत पारखी थी। कहा जाता है फ़िल्म ‘हरे राम हरे कृष्ण’ में उनकी बहन का रोल करने के लिए कोई बड़ी अभिनेत्री तैयार नहीं थी और नई लड़कियों में से कोई भी रोल में फ़िट नहीं बैठ रही थी, उसी दौरान एक पार्टी में देव आनंद की मुलाकात ज़ीनत अमान से हुई। देव साहब ज़ीनत से बात करने लगे, इसी बीच ज़ीनत ने अपने हैंडबैग से एक सिगरेट निकालकर उन्हें दी। ज़ीनत का ये अंदाज़ देव साहब को इतना भाया उन्होंने उन्हें अपनी फ़िल्म के लिए साइन कर लिया।


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3 दिसंबर 2011 को लंदन में आखिरी सांस लेने वाले देव साहब ज़िंदगी के अंतिम समय तक बहुत सक्रिय थे। उनकी ज़िंदादिली सभी के लिए एक मिसाल है।

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