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क्या हवा में एक फाइटर जेट से दूसरे को मार गिराना आसान है ?

Published on 23 June, 2017 at 6:34 pm By

वैसे तो बहुत सी हॉलीवुड फिल्मों में आज भी हवा में लड़ाकू विमानों की झड़पें दिखाई जाती हैं और यह बहुत रोमांचक भी लगती हैं। लेकिन असल ज़िन्दगी की युद्ध कला से यह लगभग समाप्त ही हो गई हैं। पिछले दिनों एक अमेरिकी लड़ाकू विमान द्वारा हवा में सीरियाई जेट को मार गिराना सन 1999 के बाद हुई पहली ऐसी घटना है। सीरियाई विमान को ऐसे अमेरिकी विमान ने गिराया, जिसे पायलट उड़ा रहा था।


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20वीं शताब्दी में हवा में विमान मार गिराने में महारथ रखने वाले पायलटों को ऐस (इक्का) कहा जाता था अमेरिका में कम से कम पाँच विमान मार गिराने वाले पायलट को ही ऐस माना जाता है, लेकिन अभी वहाँ एक भी पायलट ऐसा नहीं है, जो यह खिताब रखता हो।

सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड बजेटरी एसेसमेंट्स (सीएसबीए) की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1990 से वर्ष 2015 के बीच कुल 59 विमान हवा में मार गिराए गए थे। इनमें से अधिकतर पहले खाड़ी युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त हुए थे। नवंबर 2015 में जब तुर्की ने एक रूसी विमान को सीरियाई सीमा के नज़दीक गिराया तब यह इतनी बड़ी घटना थी कि दोनों देशों के बीच राजनयिक विवाद पैदा हो गया था।



ब्रिेटेन के रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ इंस्टीट्यूट में हवा में लड़ाकू विमानों के मुकाबलों पर शोध कर रहे जस्टिन ब्रोंक कहते हैंः हवा में आमने-सामने की लड़ाई के युग का लगभग अंत हो गया हैपहले खाड़ी युद्ध में अमेरिका और गठबंधन सेनाओं के विमानों ने पूरी तरह एकतरफा जीत हासिल की थी। उसके बाद से अमेरिका या सहयोगी देशों का हमला झेलने वाले देशों के लिए अपने हवाई क्षेत्र की रक्षा के लिए विमान भेजना दुर्लभ बात हो गई है, क्योंकि वो जानते हैं कि इसका नतीजा क्या होगा।”

वर्ष 1991 के शुरुआती महीनों में हुए उस युद्ध में इराक़ ने 33 विमान गंवाए थे और बदले में सिर्फ़ एक अमरीकी एफ-18 को मार गिराया था। इसका सबक यह हुआ कि बहुत से देशों ने अमेरिका तथा उसके सहयोगी देशों से हवा में लड़ना ही बंद कर दिया।

दूसरे खाड़ी युद्ध में सद्दाम हुसैन ने अपनी बची-खुची वायुसेना को लड़ने भेजने के बजाए अंडरग्राउंड करवा दिया था, ताकि उसे बर्बादी से बचाया जा सके।

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हवा में दुश्मन के विमान को गिराने के लिए विमान पर नज़र रखी जाती थी और उसका पीछा किया जाता था। फिर मशीन गन से नीची उड़ान भर रहे प्रोपेलर चालित विमानों पर निशाना लगाया जाता था। तकनीकी विकास के बावजूद लगभग पचास वर्षों तक हवा में लड़ाइयाँ ऐसे ही लड़ी जाती रहीं।


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लेकिन मौजूदा दौर में मानवीय आंख की जगह उन्नत तकनीक ने ले ली है। सीएसबीए द्वारा जारी किए डाटा के मुताबिक 1965 से 1969 तक हवा में विमान मार गिराने में मशीन गनों का महत्त्व 65 प्रतिशत था, लेकिन 1990 से 2002 के बीच इनका योगदान सिर्फ़ 5 प्रतिशत ही रह गया। विमान गिराने के बाक़ी मामलों में किसी न किसी प्रकार की मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था।

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