दिवाली मनाने वाली महिलाएं अब मुसलमान नहीं, दारुल उलूम का फरमान

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Updated on 21 Oct, 2017 at 6:12 pm

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देश में भले ही गंगा-जमुनी तहजीब की दुहाई बार-बार दी जाती रही है, लेकिन दारुल उलूम देवबंद की राय इससे इत्तेफाक नहीं रखती। देवबंद का कहना है कि जिन महिलाओं ने दिवाली के दिन भगवान राम की पूजा की है और दीपक जलाया था, वह अब मुसलमान नहीं हैं।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कुछ मुस्लिम महिलाओं ने न केवल दीपक जलाकर दिवाली मनाई थी, बल्कि भगवान राम की पूजा भी की थी। इस वाकये से इस्लामिक संस्थान दारुल उलूम देवबंद नाराज है।

दारुल उलूम के उलेमा का कहना है कि अल्लाह के अलावा किसी और की इबादत करने वाले को मुसलमान नहीं माना जा सकता। लिहाजा. जिन महिलाओं ने ये आरती की है वो मुसलमान नहीं रहीं।

वहीं, आरती करने वाली नाजनीन अंसारी का कहना है कि वह संस्कृति और हिंदू-मुस्लिम के सामाजिक एकीकरण के लिए काम करती हैं। भगवान श्री राम हमारे पूर्वज हैं मगर अपने पूर्वजों को नहीं बदल सकते। आरती के साथ ही उन्होंने हनुमान चालीसा का भी पाठ किया था।

दारुल उलूम देवबंद अपने उल-जुलूल फतवों के लिए भी जाना जाता है। पिछले दिनों देवबंद से फतावा जारी किया गया था कि मुसलमान, खासकर महिलाएं सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें शेयर न करें। ऐसा करना गैर-इस्लामी बताया गया था।

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