नोटबंदी के 500 और 1000 के नोटों का ऐसे भी हो सकता इस्तेमाल किसी ने सोचा नहीं होगा

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Updated on 29 May, 2018 at 5:07 pm

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पिछले साल 8 नवंबर को रात ठीक 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने की घोषणा की थी। घोषणा से पहले तक किसी को अंदाज़ा भी नहीं था कि ऐसा कुछ होने वाला है।

एकाएक घोषणा हुई और रात 12 बजे के बाद से 500 और 1000 रुपये के नोट कागज़ के टुकड़े बन गए। काला धन जिनके पास था उनमें से कईयों ने अपने पैसों को स्वाह कर दिया, तो कई ने इन्हें जल-समाधि दे दी।

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नोटबंदी का ऐलान करते हुए पीएम मोदी ने अपने भाषण में भ्रष्टाचार, कालेधन और आतंकवाद पर अंकुश लगाने को नोटबंदी की वजह बताया था। इस कदम को ब्लैकमनी के खिलाफ “सर्जिकल स्ट्राइक” करार दिया गया।

बैंकों में पुराने नोट जमा कराने को लेकर बाहर लंबी-लंबी कतारें लगने लगीं। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के मुताबिक, नोटबंदी के बाद 1000 रुपये और 500 रुपये के करीब 99 प्रतिशत नोट वापस आए। आरबीआई ने बताया कि कुल 15 लाख 44 हजार करोड़ के पुराने नोट बंद हुए थे, इनमें से 15 लाख 28 हजार करोड़ की रकम बैंकों में लौटी।

लेकिन क्या आपको पता है कि इन पुराने नोटों का आखिर क्या किया गया ?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल के उत्तरी मालाबार क्षेत्र में उन पुराने नोटों की छटाई, कटाई कर उन्हें रिसायकल किया गया। उनसे हार्डबोर्ड बनाए गए हैं।

इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक की तिरुवनंतपुरम इकाई ने कन्नूर जिले में वेस्टर्न इंडिया प्लाईवुड लिमिटेड (WIPL) के साथ करार किया और पुराने नोटों से बड़े पैमाने पर निर्माण और फर्नीचर उद्योगों में काम आने वाले हार्डबोर्ड तैयार किए गए।

 

सरकार ने नोटों को जलाने और लैंडफिल करने के बजाय इन्हें रिसायकल करना उचित समझा, जिससे पर्यावरण को कोई हानि न हो। रिसाइक्लिंग करने वाली कंपनियों ने पुराने नोटों को टुकड़ों में करने के लिए मशीनों का इस्तेमाल किया और फिर छोटी-छोटी ईट में इन्हें तब्दील कर दिया।

पुराने नोटों से हार्डबोर्ड बनाने का तरीका वाकई उपयोगी है, क्योंकि इन नोटों को बनाने में जिस कागज़ का इस्तेमाल हुआ है वह किसी भी चीज को ठोस और मजबूत बनाने में कारगर है।

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