माओवादियों के साथ संपर्क में थीं दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर, एक्टिविस्ट

author image
Updated on 18 May, 2017 at 5:25 pm

Advertisement

छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण करने के बाद एक माओवादी नेता ने दावा किया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय की एक प्रोफेसर तथा मानवाधिकार कार्यकर्ता बड़े माओवादी नेताओं के साथ संपर्क में थीं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोफेसर का नाम नंदिनी सुंदर है, जबकि मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं बेला भाटिया।

माओवादी पोडियम पांडा ने दावा किया है कि वह दक्षिण बस्तर में वरिष्ठ माओवादी नेताओं और नंदिनी सुंदर व बेला भाटिया के बीच (संपर्क के लिए) ‘एकमात्र लिंक’ था। पांडा का दावा है कि वह इन्हें सुकमा के घने जंगलों में बाइक पर रमन्ना, हिडमा पपाराव आयतु तथा अर्जुन सरीखे माओवादी नेताओं के साथ बैठक कराने ले जाता था। हिडमा को सुकमा हमले का मास्टरमाइंड माना जाता है।


Advertisement

सुकमा के एसपी अभिषेक मीणा ने बतायाः

‘माओवादी पोडियम पांडा माओवादियों के अंदर के कैडर और दिल्ली, रायपुर व अन्य शहरों के नेटवर्क सिस्टम के बीच बतौर लिंक काम कर रहा था। वह कई हमलों में भी शामिल रहा।’

दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर ने इन आरोपों को खारिज किया है। नंदिनी का आरोप है कि पोडियम पांडा से पुलिस कस्टडी में बलपूर्वक यह कबुलवाया गया है।

Express Photo

इसी बीच, पांडा की पत्नी ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि पोडियम पांडा को जिला पुलिस तथा CRPF की संयुक्त टीम ने जबरन कैद करवा रखा है। पांडा की पत्नी का दावा है कि उसे गैरकानूनी रूप से हिरासत में लिया गया है।

Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement