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13 भारतीय डकैत जिन्होंने चम्बल घाटी को आतंक का पर्याय बना दिया।

Updated on 11 March, 2019 at 7:19 pm By

जब भी कभी डकैत (Dacoits) शब्द का जिक्र होता है, तो हमारे जेहन में चम्बल घाटी (Chambal Ghati) का नाम कौंध उठता है। चम्बल घाटी के अंधेरे बीहड़ एक समय डकैतों के लिए अभयारण्य हुआ करते थे, जहां से वे डकैती, अपहरण और हत्याओं का ‘कारोबार’ चलाया करते थे। चम्बल नदी का क्षेत्र डकैतों के मामले में ऊर्वर रहा है। इस नदी घाटी के क्षेत्रों में सामन्तवादी व्यवस्था से दमित और आजिज होकर कई लोगों ने बंदूक थाम कर खुद को बागी घोषित कर दिया। ये लोकप्रिय भी होते थे। कई मामलों में इन डकैतों को अपने जाति-समूहों और क्षेत्र के लोगों का समर्थन प्राप्त था।


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यहां हम जिक्र करेंगे उन 13 डकैतों का जिन्होंने चम्बल घाटी (Chambal Ghati) को आतंक का पर्याय बना दिया था:-

 

1. मान सिंह

डकैत मान सिंह भारत की आजादी के पहले और आजादी के बाद तक सक्रिय था। वर्ष 1935 से 1955 के बीच मान सिंह ने 1, 112 डकैतियों की वारदातों को अंजाम दिया। उसने 182 हत्याएं की, जिनमें 32 पुलिस अधिकारी थे। राठौड़ राजपुतों के घराने से संबंध रखने वाले मान सिंह ने अपने पुत्रों, भाई और भतीजों की बदौलत चम्बल के इलाके पर एकछत्र राज किया। मान सिंह को स्थानीय लोग दयावान मानते थे, जो गरीबों की सेवा में तत्पर रहता था। उसकी छवि रॉबिनहुड सरीखी थी, जो अमीरों को लूट कर धन गरीबों में बांट दिया करता था। वर्ष 1955 में सेना के जवानों ने मानसिंह और उसके पुत्र सुबेदार सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी। यहां के खेरा राठौड़ इलाके में मान सिंह का एक मंदिर है, जहां उसकी पूजा की जाती है।

2. पान सिंह तोमर

पान सिंह तोमर पर हाल ही में एक फिल्म भी बनी है। तोमर के डकैत बनने के पीछे जमीन विवाद की एक कहानी है। डकैत बनने से पहले पान सिंह तोमर रुड़की स्थित बंगाल इजीनियर्स में सुबेदार के पद पर तैनात था। बाद में उसका चयन भारतीय सेना के लिए हो गया, जहां उसका झुकाव खेलों के प्रति हुआ। उसने लंबी बाधा दौड़ में में खासा नाम कमाया। अपनी मेहनत की बदौलत पान सिंह तोमर सात सालों तक लंबी बाधा दौड़ में राष्ट्रीय चैम्पियन रहा। 3 हजार मीटर के बाधा दौड़ को 9 मिनट और 4 सेकेन्ड में पूरा करने का रिकॉर्ड पान सिंह तोमर के नाम था, जिसे 10 सालों तक तोड़ा नहीं जा सका था। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद जब तोमर अपने गांव पहुंचा, तो वहां उसका विवाद बाबू सिंह के साथ हो गया, जिसने उसकी 95-वर्षीय वृद्ध मां के साथ धक्का-मुक्की थी। तोमर ने बाबू सिंह की हत्या कर दी और खुद को बागी घोषित कर दिया। बाद में 60 सदस्यीय पुलिस दल के साथ हुई मुठभेड़ में पान सिंह तोमर अपने 10 साथियों के साथ मारा गया।

3. फूलन देवी

भारतीय डकैतों की लिस्ट फूलन देवी के बगैर पूरी नहीं हो सकती। फूलन का जन्म एक गरीब मल्लाह के परिवार में हुआ था। बचपन में ही उसकी शादी उससे12 वर्ष बड़े एक व्यक्ति के साथ ब्याह दी गई थी। फूलन दो बार अपने ससुराल से भाग आई। बाद में सास-ससुर ने उसके पिता से गुजारिश की वे उसे अपने पास ही रखें। 16 वर्ष की होने के बाद फूलन जब अपने ससुराल गई तो उसके सास-ससुर और पति के साथ उसकी झड़प हो गई। उन्होंने उसे साथ रखने से मना कर दिया और एक बार फिर वापस भेज दिया। अपमानित फूलन डकैतों के एक गिरोह से जुड़ गई और अपने ससुराल जाकर पति को चाकू मार घायल कर दिया। फूलन के गिरोह का सामना जब-तब ठाकुरों के गिरोह से होता रहता था। एक मुठभेड़ के दौरान फूलन को बंदी बना लिया गया और तीन सप्ताह तक कई लोगों ने उसके साथ बलात्कार किया। फूलन देवी ने इसका बदला लिया। उसने एक रात 22 ठाकुरों की गोली मार कर हत्या कर दी। वर्ष 1983 में फूलन ने समर्पण कर दिया। वर्ष 1996 में फूलन देवी राजनीति से जुड़ गईं। वर्ष 2001 की 25 जुलाई को दिल्ली में तीन लोगों ने उसकी हत्या कर दी।

4. जगजीवन परिहार

उत्तर प्रदेश के कोरेला गांव में जगजीवन परिहार ने एक ब्राह्मण परिवार के मुखिया की हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद वह डकैत सलीम गुर्जर के गिरोह के साथ जुड़ गया। कुछ दिनों के बाद सलीम के साथ अनबन होने की वजह से परिहार ने अपना एक अलग गिरोह बना लिया। अपना गिरोह बनाने से पहले परिहार मध्य प्रदेश पुलिस के लिए मुखबिर का काम भी करता था। परिहार को दबोचना स्थानीय पुलिस प्रशासन के लिए एक चुनौती भरा काम था, क्योंकि उसे ग्वालियर और भिंड क्षेत्र के लोगों का समर्थन प्राप्त था। जगजीवन परिहार ने प्रण लिया था कि वह अपने जीवनकाल में 101 लोगों की हत्या करेगा। वर्ष 2007 के मार्च महीने में एक मुठभेड़ के दौरान पुलिस ने परिहार को मार गिराया। इस घटना में एक इन्सपेक्टर की मौत भी हो गई थी।

5. पुतली बाई


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उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक पुतली बाई इस देश की प्रथम महिला डकैत थी। माना जाता है कि पुतली बाई एक नर्तकी थी, जिसका अपहरण सुल्ताना डाकू ने कर लिया था। पुलिस के दबाव की वजह से वह मुखबिर के रूप में काम करने लगी और डकैतों के पास वापस पहुंच गई। बाद में पुतली बाई को सुल्ताना से प्रेम हो गया और उसने दो बच्चों को जन्म दिया। बाद में पुलिस के साथ एक मुठभेड़ के दौरान सुल्ताना की मौत हो गई। इस घटना के बाद पुतलीबाई ने गिरोह की कमान अपने हाथ में ले ली। करीब तीन सालों तक उसने चम्बल घाटी के क्षेत्र में हत्या, अपहरण और फिरौती की घटनाओं को अंजाम देकर अपना दबदबा कायम रखा। इस क्षेत्र के दतिया गांव में पुतली बाई ने एक ही रात 11 लोगों की हत्या कर दी थी और 5 लोगों को बुरी तरह घायल कर दिया। यही नहीं, पुतली बाई के गिरोह के सदस्य 7 लोगों का अपहरण भी कर ले गए। दरअसल, पुतली बाई को शक था कि दतिया के लोगों ने पुलिस को उसके बारे में जानकारी दी थी। बाद एक मुठभेड़ के दौरान पुतली बाई अपने प्रेमी कल्ला गुर्जर के साथ मारी गई।

6. मलखान सिंह



मलखान सिंह के डकैत और फिर डकैत से सामान्य आदमी बनने की कहानी दिलचस्प है। मलखान सिंह ने अपने गांव के सरपंच पर आरोप लगाया था कि उसने मंदिर की जमीन हड़प ली। युवा मलखान ने जब इस घटना का विरोध किया तो सरपंच ने उसे गिरफ्तार करवा दिया और उसके मित्र की हत्या करवा दी। माना जाता है कि वह सरपंच एक मंत्री का करीबी था और पुलिस उस तक नहीं पहुंच सकती थी। विरोध स्वरूप मलखान सिंह ने राइफल उठा ली और खुद को बागी घोषित कर दिया। वर्ष 1982 में मलखान सिंह ने अपने गिरोह के अन्य साथियों के साथ मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने आत्मसर्मपण कर दिया। सरकार ने मलखान और उसके गिरोह के अन्य साथियों को समाज की मुख्यधारा में लाने की कोशिश की। उसे भूदान आन्दोलन के तहत मिली जमीन दी गई, ताकि वह सामान्य आदमी के रूप में अपना गुजर-बसर कर सके। बाद में मलखान सिंह ने पंचायत चुनाव लड़ा और इसमें जीत हासिल की। वर्ष 1914 के चुनावों में मलखान ने भारतीय जनता पार्टी और नरेन्द्र मोदी के पक्ष में यह कहते हुए चुनाव प्रचार किया था कि वह कांग्रेस के राज में डकैत बनने के लिए बाध्य हुआ था।

7. रामबाबू और दयाराम गडडिया

रामबाबू और दयाराम गडडिया भाई थे, जो बाद में कुख्यात डकैत बन गए। मध्यप्रदेश की पुलिस ने उनके गिरोह को T1 – Target One – का नाम दिया था। यह गिरोह इस सफाई के साथ काम करता था कि पुलिस को यह तक नहीं पता था कि इसके आखिर कितने सदस्य हैं। माना जाता है कि वर्ष 1997 और 1998 में रघुबीर गडडिया ने इस गिरोह को बनाया था। दरअसल, रघुबीर की पत्नी उसे छोड़कर किसी अन्य व्यक्ति के साथ रहने चली गई थी। रघुबीर ने अपनी पत्नी और उसके प्रेमी की हत्या कर दी और अपने भतीजों रामबाबू, दयाराम, विजय, प्रताप और गोपाल के साथ मिलकर एक गिरोह बना लिया। वर्ष 1999 में एक आपराधिक वारदातत के दौरान गोली लगने के वजह से रघुबीर मारा गया। उसके साथ मारे जाने वालों में 3 अन्य सदस्य भी थे। वर्ष 2000 में इस गिरोह के कई सदस्य पुलिस के हत्थे चढ़ गए, लेकिन ये लोग 2001 में एक जेल से दूसरे जेल ले जाते समय पुलिस को झांसा देकर भाग निकले। वर्ष 2006 के अगस्त महीने में एक मुठभेड़ के दौरान दयाराम की मौत हो गई। वहीं वर्ष 2007 में रामबाबू एक मुठभेड़ के दौरान मारा गया।

8. सुल्ताना डाकू

उत्तर प्रदेश के जिलों में सुल्ताना डाकू की कथा एक किंवदन्ती सरीखी है। 1920 के दशक में उत्तर प्रदेश के प्रान्त में सुल्ताना डाकू का खौफ था। सुल्ताना का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। सुल्ताना के पास एक चेतक नामक घोड़ा था। सुल्ताना डाकू के बारे में कई चर्चिच किस्से हैं। उनमें से एक है कि एक अंग्रेज युवती सुल्ताना के प्रेम पाश में बंध गई थी। अन्य कथा के मुताबिक सुल्ताना ने एक प्रेम कुंवर नामक युवती का अपहरण कर लिया था, जो बाद में पुतली बाई बनी और उसके गिरोह का काम-काज आगे बढ़ाया। माना जाता है कि सुल्ताना डाकू अंग्रेजों के खिलाफ था, जबकि उसे स्थानीय लोग प्यार करते थे। उसके बारे में एक चर्चित कथा है कि वह ब्रिटिश राज के ट्रेनों को लूटकर गरीबों में बांट दिया करता था। बाद में उसे पकड़ लिया गया और मौत की सजा सुनाई गई। फ्रेडी यंग नामक एक ब्रिटिश अधिकारी ने सुल्ताना को क्षमादान दिलाने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन वह कामयाब नहीं हो सका। उसे वर्ष 1924 की 7 जुलाई को फांसी दे दी गई।

9. निर्भय गुज्जर

चम्बल घाटी के इलाके के करीब 40 गावों में निर्भय सिंह गुज्जर ने एक समानान्तर सरकार बना रखी थी। उसके सिर पर सरकार ने 2.5 लाख रुपए का इनाम रखा था। वर्ष 2005 के 8 नवंबर को पुलिस के साथ एक मुठभेड़ के दौरान गुज्जर की मौत हो गई। निर्भय गुज्जर को न केवल कई आपराधिक वारदातों के लिए जाना जाता था, बल्कि उसके गिरोह में कई खूबसूरत लड़कियां सदस्य थीं। इन दस्यु संदरियों में सीमा परिहार (बिग बॉस फेम), मुन्नी पांडे, पार्वती उर्फ चमको, सरला जाटव और नीलम प्रमुख थीं। निर्भय ने इन लड़कियों का अपहरण किया था और बाद में ये उसके गिरोह की प्रमुख सदस्य बन गईं थीं। निर्भय गुज्जर की मौत के बाद सरला जाटव ने इस गिरोह की कमान अपने हाथ में ले ली। निर्भय गुज्जर ने चार शादियां की थीं। चौंकाने वाली बात यह है कि निर्भय ने मुरैना जिले से प्राचीन बटेश्वर मंदिर की खनन माफिया से रक्षा की करने में महती भूमिका निभाई थी।

10. सीमा परिहार

सीमा परिहार का जन्म उत्तर प्रदेश के एक गरीब ठाकुर परिवार में हुआ था। वर्ष 1983 में सिर्फ 13 वर्ष की आयु में डकैत लाला राम और कुसुमा नाईन ने उसका अपहरण कर लिया था। सीमा परिहार ने डकैतों के गिरोह में आने के बाद उनके साथ ही रहना उचित समझा और वर्ष 1986 में निर्भय सिंह गुज्जर के साथ शादी रचा ली। सम बीतने के साथ उसने अपना एक अलग गिरोह बना लिया। सीमा परिहार ने 70 लोगों की हत्याएं की और 200 लोगों का अपहरण किया। यही नहीं, उसने 30 से अधिक घरों में डकैती की वारदातों को अंजाम दिया था। वर्ष 2000 में उसने उत्तर प्रदेश पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। राजनीति में जाने की महात्वाकांक्षी सीमा ने वर्ष 2002 में उत्तर प्रदेश के चुनावों में शिव सेना का समर्थन किया था। वर्ष 2006 में वह इन्डियन जस्टिस पार्टी से जुड़ गई। वर्ष 2008 के शुरू में उसने अपनी नई शुरूआत लोक जनशक्ति पार्टी के साथ शुरू की। लेकिन इसी साल के अंत में सीमा ने लोक जनशक्ति पार्टी को अलविदा कहते हुए समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। बाद में सीमा ने टीवी सीरीज बिग बॉस में हिस्सा लिया। उसके जीवन पर एक फिल्म भी बन चुकी है। नाम हैः वुन्डेड- द बैन्डिट क्वीन।

11. ददुआ

शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ, चम्बल के क्षेत्र में आतंक का पर्याय था। 16 मई 1978 को 22 साल की उम्र में ददुआ ने पहली हत्या की थी। कहा जाता है कि उसने अपनी पिता की हत्या का बदला लिया था। इस घटना के एक घंटे बाद ही उसे पुलिस गिरफ्तार कर ले गई। यह ददुआ की पहली और आखिरी गिरफ्तारी थी। जेल से छूटने के बाद ददुआ राजा रगोली के गिरोह से जुड़ गया। वहां उसने गया कुर्मी से आपराधिक गतिविधियां सीखी। राजा के गिरोह के सदस्य एक के बाद एक ढेर हो रहे थे, तभी ददुआ ने अपना गिरोह बनाया और उसे कुर्मी समुदाय की सहानुभूति प्राप्त थी। वर्ष 1986 में ददुआ ने एक व्यक्ति को पुलिस का मुखबिर बता तक हत्या कर दी। यही नहीं उसने 9 अन्य लोगों की भी निर्ममता से हत्या कर दी थी। प्रशासन द्वारा बढ़ती दबिश को देख ददुआ ने अपने परिवार के सदस्यों को राजनीति में लाना शुरू कर दिया। 22 जुलाई 2007 को ददुआ अपने गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।

Dadua - Chambal Ghati Dacoit

12. अनीसा बेगम

अनीसा बेगम के के बारे में कहा जाता है कि वह कोई भी हथियार आसानी से चला सकती थी। उसे न केवल लाठी चलाने का ज्ञान था, बल्कि वह बंदूक, राइफल, छुरी और चाकू से भी हमला करना जानती थी। अनीसा का जन्म जालौन जिले के रामपुरा गांव में हुआ था। उसके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है कि वह कैसे डकैत बन गई। लेकिन यह पता है कि वह सलीम गुज्जर के गिरोह की एक प्रतिष्ठित सदस्या थी। बाद में उसने सलीम गुज्जर से दूरी बनाते हुए अपना एक अलग गिरोह शुरू कर लिया। अनीसा बेगम ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के इलाकों में कई डकैतियों को अंजाम दिया। उसका नाम लोगों में खौफ पैदा करने के लिए काफी था।

13. सरला जाटव


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निर्भय सिंह गुज्जर की मौत के बाद सरला जाटव ने ही उसके गिरोह की कमान संभाली थी। माना जाता है कि उसने गिरोह को दो टुकरों में बांट दिया था। सिर्फ 11 साल की उम्र में ही सरला का अपहरण कर लिया गया था। वह निर्भय सिंह गुज्जर के साथ ही रहती थी। निर्भय ने पहली शादी मुन्नी पांडे के साथ की थी। बाद में उसने नीलम गुप्ता को दूसरी पत्नी बनाया। निर्भय ने सरला की शादी 16-साल की आयु के श्याम जाटव से करा दी। लेकिन सरला की उम्र और सुन्दरता बढ़ने के साथ ही निर्भय ने उस पर डोरे डालने शुरू कर दिए। उसने सरला को भागने में मदद की और हर तरफ खबर फैला दी कि सरला की मौत सर्प-दंश से हो चुकी है। जीन्स और रे-बैन गॉगल्स की शौकीन सरला को पुलिस के मुखबिरों ने पहचान लिया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

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