इन्टरनेट पर कितना सुरक्षित है भारत; साइबर वॉरफेयर के बारे में जानिए ये 11 बातें

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Updated on 22 Jun, 2016 at 6:01 pm

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आज युद्ध किसी बड़े मैदान पर नहीं, बल्कि घर के अन्दर लड़े जा रहे हैं। कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साइबर वॉरफेयर को ‘रक्तविहीन’ युद्ध की संज्ञा दी थी। ऐसा इसलिए, क्योंकि कई बार तो ये हथियारों वाले युद्ध से भी अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।

साइबर क्राइम से करीब-करीब पूरी दुनिया पीड़ित है। पिछले साल चीनी हैकरों की पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी में की गई करामात ने अमेरिका जैसी ताकत को भी हिला कर रख दिया है।

भारत अपने अशांत पड़ोसियों से घिरा हुआ है। यही वजह है कि भारत भी इस हमले की जद से बाहर नहीं है। हाल में ही भारतीय सेना के जवानों की गोपनीय सूचनाओं को स्मैश एप जैसे फर्जी एप्लीकेशन के द्वारा हैकर्स ने चुरा लिया था। आज हम आपको बताएंगे कि साइबर हमले से हम कैसे और कितने प्रभावित हैं और इससे निपटने की हमारी तैयारियां क्या है।

1. कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम ऑफ़ इंडिया (CERT-IN) और इन्फॉर्मेशन शेयरिंग एंड एनालिसिस सेंटर (ISAC) की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार भारत में साल 2006 में साइबर क्राइम के 5211 मामले प्रकाश में आए। 2011 में यह बढ़कर 13,306 हो गया। तीन साल बाद ये 2014 के जून तक यह आंकड़ा 62,189 तक जा पहुंचा है।

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2. गृह मंत्रालय के सूत्रों की मानें, तो अधिकतर साइबर हमले प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्रालय और DRDO जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विभागों पर किए जाते हैं। कई बार तो ये प्रभावी भी हो जाते हैं। पिछले महीने हरियाणा के शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर अचानक ISIS का फ्लैग दिखने लगा और उसमे लिखा था “हम हर जगह हैंं “।

3. 2013 में असम में हुए दंगों के समय, साइबर वर्ल्ड में हुई अलगाववादी टिप्पणियों और मिथ्या ख़बरों के कारण उत्तर-पूर्व के लोग बेंगलूरू शहर से भागने लगे थे । बाद में साइबर एक्सपर्ट्स ने साफ़ किया कि इन सब ख़बरों को भारत की एकता विखंडित करने के लिए पाकिस्तान चलवा रहा था।

4. ये हैकर सरकार और कॉरपोरेट्स के कारोबार को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं। पॉवर ग्रिड,फाइनेंसियल और ट्रासपोर्ट नेटवर्क के अलावा कई ऑफिसियल डाटा ऑनलाइन होता है, जिसे नियंत्रण में लेकर गुप्त दस्तावेज चुराये या नष्ट किये जा सकते हैं। इनकी सुरक्षा के लिए एथिकल हैकर्स की भारी फ़ौज की जरूरत महसूस की जा रही है।

5. Symantec के मुताबिक़ भारत में हर साल 4 करोड़ साइबर क्राइम होता है। हमारे यहाँ आज भी व्यापक पैमाने पर इंटरनेट यूज करने वाली जनता को इसकी जानकारी नहीं है, इसलिए ये मामले पता नहीं चल पाते। हालांकि, सरकार ने इस पर रोक लगाने के लिए IT-एक्ट, साइबर लॉ और साइबर सिक्योरिटी पॉलिसी जैसे कई पर्याप्त कानून और दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं।

6. अपनी साइबर सुरक्षा में हम बहुत कमजोर हैं। संसद के पिछले सत्र के दौरान सूचना और प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद ने स्वयं माना कि हम ये पता कर पाने के बावजूद, हैकिंग के खिलाफ कुछ ख़ास नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि ज्यादातर हमले भारत के बाहर से हो रहे हैं। इसे रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की मदद चाहिए होगी।

7. जापान ने इस दिशा में भारत के साथ काम करने में सहमति जताई है। जापान-CERT और CERT-IN ने आपस में सूचनाओं के आदान-प्रदान और महत्वपूर्ण तकनीक शेयर करने का भी फैसला किया है।

8. चीन और पाकिस्तान साइबर हैकिंग को सेना का अभिन्न अंग बना चुके हैं। पाकिस्तान आर्मी कश्मीर, पाकिस्तान G फ़ोर्स और पाकिस्तान साइबर आर्मी जैसे कई नामों से लगातार भारतीय तंत्र को नुक्सान पहुंचाने की फिराक में है। अब तक वे 500 से अधिक भारतीय वेबसाइट्स को हैक कर चुके हैं।

9. विस्तारवादी चीन यहां भी दो-कदम आगे है। भारत की खुफिया सूचनाओं में सेंध लगाने के लिए चीन ने अनगिनत हैकर्स तैनात कर रखे हैं। NTRO की हाल की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन हमारे प्रतिष्ठानों की सबसे अधिक साइबर जासूसी करवाता रहा है। उसने बाकायदा इसके लिए टीनएजर हैकर्स की बड़े पैमाने पर भर्ती कर रखी है। एक्सपर्ट्स को शक है कि शायद चीन से सॉफ्टवेयर और आईटी के सामान के साथ मालवेयर भी भेजे जाते हैंं।

10. अमेरिका और cकी तर्ज पर नॉर्थ कोरिया जैसे देश अपनी साइबर आर्मी को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। हालांकि, भारत भी इसमें बहुत पीछे नहीं है। करीब एक दशक पहले से ही भारतीय सेना की खुफिया विंग ने ‘साइबर एक्सपर्ट्स’ की मदद लेना शुरु कर दिया था। खुफिया एजेंसी RAW नेशनल टेक्निकल रिसर्च आर्गेनाईजेशन (NTRO) जैसी साइबर यूनिट के साथ काम कर रहा है।

11. इसके बावजूद हम अब भी जरूरत के लिहाज से तुलनात्मक रूप से पिछड़ते दिखाई पड़ रहे हैं। साइबर सुरक्षा पुलिस नाकाफी साबित हो रही है। हमारे सर्वर बहुत असुरक्षित हैंं। पाकिस्तान पहले ही सीबीआई और बीएसएनएल की वेबसाइट को हैक कर चुका है। ऐसे में इन हमलों से निजात पाने के लिए न केवल रक्षात्मक रूप से, बल्कि इन पर काउंटर अटैक करने की ज्यादा जरूरत है।

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