गुजरात के इस शहर में करोड़पति करते हैं मजदूरी का काम; बैंकों में पड़े हैं ढे़र सारे रुपए

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5:49 pm 9 Dec, 2015

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गुजरात के साणंद शहर में सैकड़ों ऐसे लोग हैं, जो करोड़पति हैं, लेकिन करते हैं मजदूरी। आप शायद यकीन नहीं कर रहे होंगे, लेकिन यह सच्ची खबर है। यहां की अलग-अलग फैक्ट्रियों में काम करने वाले मशीन ऑपरेटर्स, फ्लोर सुपरवाइजर्स, सिक्युरिटी गार्ड और यहां तक कि चपरासी के बैंक अकाउन्ट्स में करोड़ों रुपए हैं। इसके बावजूद ये मजदूरी करते हैं।

इस वजह से फैक्ट्री मालिक भी सांशत में हैं। उनके सामने समस्या है कि वे अपने करोड़पति कर्मचारी को कैसे हैन्डल करें। कैसे उन्हें अपनी कम्पनियों में रोक कर रखें या बेहतर नतीजे देने के लिए कहें।

कुछ साल पहले तक हालात ऐसे नहीं थे। दरअसल, हाल के दिनों में गुजरात सरकार ने यहां चार हजार हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया है और इसके बदले स्थानीय लोगोंं को करोड़ों रुपए मिले हैं।

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छोटी सी कम्पनी में 150 करोड़पति कर्मचारी

रविराज फोइल्स लिमिटेड एक छोटी सी कम्पनी है। इसके 300 कर्मचारियों में से 150 कर्मचारियों का बैंक बैलेन्स एक करोड़ से अधिक का है। साणंद शहर में पहली बार वर्ष 2008 में टाटा मोटर्स ने यहां अपना प्लान्ट लगाया था। तब से लेकर अब तक यहां करीब 200 से अधिक यूनिट्स स्थापित किए जा चुके हैं और यह क्षेत्र औद्योगीकरण का बड़ा हब बन कर उभरा है।

बैंकों में जमा हैं 3 हजार करोड़ रुपए

वर्ष 2008 से पहले साणंद में दो बैंकों की सिर्फ 9 शाखाएं ही थीं, जिनमें करीब 104 रुपए जमा थे। लेकिन पिछले कुछ सालों में यहां 25 बैंकों ने 56 शाखाएं खोली हैं और इनमें 3 हजार करोड़ रुपए से अधिक जमा हैं। भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाली मोटी को लोगों ने सोना, बैंक डिपॉजिट्स आदि में निवेश कर रखा है।

कर्मचारियों से नौकरी करवाना बना चुनौती

कंपनियों के सामने एक बड़ी दिक्कत इन कर्मचारियों से काम लेना है। साथ ही इन्हें रोक कर रखना भी एक चुनौती है। इन कर्मचारियों का औसत वेतन 9 हजार रुपए से लेकर 20 हजार रुपए तक है, लेकिन उनकी आय का एक मात्र साध नौकरी नहीं है। बैंकों में जमा पैसों से उन्हें ढेर सारा ब्याज मिलता है। और उन्होंने अन्य जगहों पर भी निवेश कर रखा है।

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