यह है देवताओं का न्यायालय; यहां मिलती है देवी देवताओं को सजा

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Updated on 25 Nov, 2015 at 3:16 pm

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अगर आपको कोई कहे कि देवी-देवताओं के लिए भी न्यायालय होता है तो क्या आप विश्वास करेंगे? शायद नहीं। लेकिन अपने देश में एक जगह ऐसी है, जिसे देवताओं का न्यायालय कहा जाता है।

मान्यता है कि अगर देवी-देवता आपकी मन्नत पूरी नहीं करते है तो उन्हें इस अदालत में पेश किया जाता है। उनके अपराध सुने जाते हैं और इसके सिद्ध होने पर भगवान को सजा सुनाई जाती है।

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जी हां, सजा के रूप में मंदिर से निष्कासन से लेकर मृत्युदंड तक कुछ भी हो सकता है। यह अदालत है छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में। बस्तर के केशकाल नगर में भंगाराम देवी का मंदिर है, जहां प्रतिवर्ष भादवे के महीने में जात्रा आयोजित किया जाता है। दरअसल, भंगाराम देवी स्थानीय लोगों की आराध्या देवी हैं।

यहां आयोजित होने वाले जात्रे में एक देव अदालत लगती है, जिसमे आरोपी होते हैं देवी-देवता और फरियादी होते है गांव के लोग।

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सुबह से लेकर शाम तक ग्रामीण भंगाराम देवी के सामने शिकायत सुनाते है। मान्यता है कि यहां देवी के मंदिर के मुख्य पुजारी के अन्दर देवी खुद आती हैं और उसके माध्यम से फैसले सुनाती हैं।

देवताओं को सजा उनके द्वारा किए गए अपराध पर निर्भर करता है। सजा के रूप में 6 महीने के निष्कासन से लेकर अनिश्चितकालीन निष्कासन और यहाँ तक की मृत्यु दंड भी दिया जा सकता है।

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मृत्युदंड दिए जाने की अवस्था में मूर्ति खंडित कर दी जाती है, जबकि निष्कासन की सजा पाए देवी-देवताओं की मुर्तियों को मंदिर के पास ही बनी एक खुली जेल में छोड़ दिया जाता है।

सजा की निश्चित अवधि के बाद देवी-देवताओं की वापसी होती है। अनिश्चितकाल के लिए निष्कासित देवी-देवताओं की वापसी तब होती है जब वे अपनी गलतियों को सुधारते हुए भविष्य में लोक कल्याण के कार्यों को प्राथमिकता देने का वचन देते हैं।

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माना जाता है कि वे इस तरह के वचन पुजारी को स्वप्न में आकर देते हैं। वापसी से पूर्व उनकी विधि विधान से पूजा की जाती है और फिर सम्मानपूर्वक उनको ले जाकर मंदिर में पुनः स्थापित कर दिया जाता है।

फोटो साभारः इनसिस्ट पोस्ट


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