सेना के जवान का 26 साल पुराना कोर्ट मार्शल रद्द, मिलेगा 5 करोड़ का हर्जाना

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Updated on 22 Jan, 2017 at 2:54 pm

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आर्म्‍ड फोर्सेज ट्रिब्‍यूनल ने सेना के एक जवान के 26 साल पुराने कोर्ट मार्शल को गलत ठहराते हुए रद्द कर दिया है और सैकंड लेफ्टिनेंट अधिकारी की सेवाएं फिर से बहाल करने के आदेश के साथ ही रक्षा मंत्रालय पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

रिपोर्ट के अनुसार, 19 जनवरी को आदेश जारी करते हुए जस्टिस डीपी सिंह और एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने एसएस चौहान का कोर्ट मार्शल खारिज कर दिया। उन्‍होंने रक्षा मंत्रालय को पुनर्नियुक्ति व लेफ्टिनेंट कर्नल के स्‍तर तक की प्रमोशनल सुविधाएं जैसे सैलेरी, पेंशन देने को कहा है।

मैनपुरी के रहने वाले एसएस चौहान भारतीय सेना की छठी राजपूत बटालियन में सैकंड लेफ्टिनेंट थे। खबरों के मुताबिक, एसएस चौहान का 1991 में उस वक्त कोर्ट मार्शल कर दिया गया था जब उन पर सेना से विश्वासघात और मानसिक रूप से अस्‍थायी जैसे कई संगीन आरोप लगे थे।


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चौहान का 4 नवंबर, 1991 को कोर्ट मार्शल कर दिया गया था। इसके बाद जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ श्रीनगर ने भी इस आदेश को मंजूरी दे दी थी। चौहान के खिलाफ यह कार्रवाई 11 अप्रैल, 1990 को श्रीनगर में सर्च ऑपरेशन के दौरान, 27.5 किलो के 147 सोने के बिस्किट जब्‍त करने के बाद शुरू हुई।

एसएस चौहान ने अपनी याचिका में कहा था कि सोने के बिस्किट बरामद होने के समय दूसरे जवान भी मौजूद थे। उन्‍होंने इस सामान को कर्नल केआरएस पवार और लेफ्टिनेंट जनरल जकी मोहम्‍मद अहमद को सौंप दिया था। उन्‍होंने आरोप लगाया कि यह बिस्किट सेना के सीनियर अधिकारियों ने गायब कर दिए। ट्रायल के दौरान ट्रिब्‍यूनल ने माना कि चौहान के सीनियर अधिकारियों ने उन्‍हें झूठे मामले में फंसाया ताकि सोने की बरामदगी को सरकार से बचाया जा सके।

जस्टिस सिंह और एयर मार्शल चोपड़ा ने आर्मी स्‍टाफ चीफ को  इस मामले को देखने के निर्देश दिए हैं और चार महीनों में जांच पूरी कर उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा है जिन्‍होंने चौहान को फंसाया।

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