एकदम सही पकड़े हैं! खराब हैंडराइटिंग के चलते 3 डॉक्टरों पर लगा 5-5 हज़ार का जुर्माना

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Updated on 6 Oct, 2018 at 1:05 pm

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डॉक्टर और मेडिकल स्टोर के बीच का प्यार जगज़ाहिर है, क्योंकि डॉक्टर पर्ची पर जो दवाइयां लिखते हैं, किसी की मजाल है जो और कोई उसे समझ ले। इनकी लिखावट को जो समझ ले, उसे इस दुनिया के ज्ञानियों में शामिल किया जाए तो गलत नहीं होगा। उसे सिर्फ और सिर्फ केमिस्ट वाले ही समझ सकते हैं। इस बात पर सारे केमिस्ट भाइयों के लिए तालियां तो बनती हैं।

 

लेकिन कभी-कभी इनकी लिखावट इतनी खराब होती है कि मेडिकल वाले डॉक्टर द्वारा लिखे पहले अक्षर के मुताबित ही दवाईयां दे देते हैं, जिसकी वजह से बहुत बार गलत दवाई तक दे दी जाती हैं।

 

 

अब इसी गंदी लिखावट को लेकर उत्तर प्रदेश की एक अदालत ने तीन डॉक्टरों पर 5 हजार रुपये का फाइन लगाया है। जी हां, बिलकुल सही सुने आप। तीन अलग- अलग मामलों की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा डॉक्टरों की लिखावट को समझ पाना जज और वकीलों के लिए भी टेढ़ी खीर का काम है।

 

दरअसल, तीन अपराधिक मामलों की सुनवाई के दौरान सीतापुर, उन्नाव और गोण्डा जिले के इन डॉक्टरों ने जो मरीज को चोट लगने की रिपोर्ट लिखी थी उसकी लिखावट इतनी खराब थी उसे पढ़ना मुश्किल हो गया। ऐसे में बेंच ने इसे अदालती कार्रवाई में बाधक बता कर तीनों डॉक्टरों को समन भेज डाला।


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इनमें उन्नाव से डॉ टीपी जयसवाल, सीतापुर से डॉ पीके गोयल और गोण्डा के डॉ आशीश सक्सेना शामिल हैं। इन डॉक्टरों ने अपनी राइटिंग को लेकर दलील दी कि उन पर काम इतना होता है कि उनकी लिखाई खराब रहती है।

 

 

कोर्ट ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी (गृह), प्रिंसिपल सेक्रेटरी (चिकित्सा एवं स्वास्थ) और डायरेक्टर जनरल (चिकित्सा एवं स्वास्थ) से आगे से ये सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि दवाएं और डॉक्टरी रिपोर्ट आसान भाषा और पढ़ने लायक लिखाई में होनी चाहिए। कोर्ट ने आगे कहा कि मेडिकल रिपोर्ट साफ़ और आसान भाषा में न लिखी होने के कारण कोर्ट की कार्रवाई पर गलत असर पड़ता है।

यहां आपको ये भी बताना जरूरी है कि हर साल डॉक्टर्स की गन्दी हैंडराइटिंग की वजह से लगभग 7 हजार लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। ऐसे में इस मामले को डॉक्टर्स को भी थोड़ी गंभीरता का पालन करना चाहिए। पर्ची पर रेल गाड़ी न दौड़ाएं और अपनी लिखावट को पढ़ने लायक बनाएं।

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