नोटबंदी के कारण देश में कम हुआ भ्रष्टाचार, घूसखोरी में आई कमी: सर्वे

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Updated on 29 Apr, 2017 at 7:06 pm

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नोटबंदी के बाद से देश में भ्रष्टाचार और घूसखोरी के मामलों में कमी आई है। 2005 के मुकाबले सरकारी अधिकारियों में घूसखोरी घटी है। यह थिंकटैंक सीएमएस- इंडियन करपशन स्टडी ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है।

सीएमएस ने नोटबंदी के बाद इस साल जनवरी के दौरान 20 राज्यों में फोन पर एक सर्वे कराया। सर्वे के मुताबिक, 56 फीसदी लोगों ने माना कि नोटबंदी की वजह से भ्रष्टाचार में कमी आई है। वहीं 21 फीसदी लोगों ने कहा कि हालात अभी भी पहले जैसे ही है और वहीं बाकी फीसदी लोगों ने इस विषय में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।

थिंकटैंक सीएमएस की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक दशक की तुलना में घूसखोरी और भ्रष्टाचार के मामले तेजी से घटे हैं।

सीएमएस की यह रिपोर्ट 20 राज्यों के 3 हजार परिवारों के अनुभव के आधार पर तैयार की गई है। यह सर्वे पुलिस, न्यायिक सेवाएं, जल विभाग, राशन की दुकानें और बिजली विभाग जैसी जगहों पर आधारित है।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जहां 2005 में73 फीसदी परिवारों का मानना था कि सार्वजनिक सेवाओं में भ्रष्टाचार बढ़ा। 2017 में ऐसी राय सिर्फ 43 फीसदी परिवारों की रही।

20 राज्यों की 10 सार्वजनिक सेवाओं में जहां 2005 के दौरान करीब 20 हजार 5 सौ करोड़ रुपये बतौर घूस दिए गए, वही 2017 में ये रकम घटकर 6350 करोड़ रुपये रह गई।


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रिपोर्ट में शामिल 20 राज्यों में तीन सबसे कम भ्रष्ट्र राज्यों में हिमाचल प्रदेश (3 फीसदी) पहले स्थान पर, केरल (4 फीसदी) दूसरे स्थान पर औऱ छत्तीसगढ़ (13 फीसदी) के साथ तीसरे स्थान पर है। वहीं सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार करने वाले राज्यों में कर्नाटक सबसे ऊपर और उसके बाद आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र का नाम है।


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