पार्टी में बगावत से कांग्रेस परेशान; अब मणिपुर में जाएगी सरकार?

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Updated on 29 Mar, 2016 at 2:23 pm

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अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बाद कांग्रेस पार्टी के लिए एक और बुरी खबर है। अब मणिपुर में कांग्रेस पार्टी की सरकार संकट के दौर से गुजर रही है। बताया गया है कि राज्य के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के खिलाफ पार्टी के 25 विधायकों ने बगावत कर दी है।

दरअसल, ये बागी विधायक कैबिनेट में फेरबदल की मांग कर रहे थे। संकट तब शुरू हुआ, जब इन विधायकों ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के संकेत दिए।

बागी विधायकों ने मुख्यमंत्री इबोबी सिंह को चेतावनी दी है कि उनकी मांग मानी जाए या फिर मुश्किलों का  सामना करने के लिए तैयार रहे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस अालाकमान ने इबोबी सिंह को नई दिल्ली तलब किया है।

इस बीच, वरिष्ठ कांग्रेस नेता वी नारायणसामी ने दावा किया है कि मणिपुर में सारे मतभेद सुलझा लिए जाएंगे। गौरतलब है कि पूर्वोत्तर के इस राज्य में वर्ष 2017 में चुनाव होने हैं।

मणिपुर विधानसभा में कुल 60 सीटें हैं। इनमें कांग्रेस 47, तृणमूल कांग्रेस 5, नगा पीपुल्स फ्रन्ट 4, भाजपा 2, लोकजनशक्ति पार्टी 1 तथा नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी की 1 सीटें हैं।


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बढ़ रही है कांग्रेस की परेशानी

पार्टी में लगातार बगावत के दौर से कांग्रेस में बेचैनी है। मणिपुर ही नहीं, हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस पार्टी को झटका लग सकता है।

हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के बाद हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सोमवार को नई दिल्ली पहुंचकर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की।

बाद मे संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने कहाः

”उन्होंने (केंद्र ने) जो उत्तराखंड में किया, वैसा वह और राज्यों के साथ भी कर सकते हैं। ये पॉवर का मिसयूज है, लेकिन हमें कोई खतरा नहीं।”

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कुछ 68 सीटें हैं। सत्तारूढ कांग्रेस पार्टी के पास 36, भाजपा के 26 और निर्दलीय 6 विधायक हैं।

फिलहाल सात राज्यों में कांग्रेस पार्टी की सरकार है। इनमें बड़ा राज्य सिर्फ कर्नाटक है। असम और केरल में जल्द ही चुनाव होने वाले हैं।

इनके अलावा चार छोटे राज्यों मिजोरम, मणिपुर, मेघालय और हिमाचल में ही कांग्रेस पार्टी की सरकार है।

गौरतलब है कि वर्ष 2014 के आम चुनावों के दौरान नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया था और इसे ही आधार बनाकर चुनाव मैदान में उतरे थे।


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