पत्रकार रवीश कुमार के भाई पर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप !

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8:45 pm 22 Feb, 2017

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बिहार के एक पूर्व मंत्री की नाबालिग बेटी ने तीन लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे राज्य की राजनीति में उबाल आ गया है। इनमें से एक व्यक्ति का नाम संजीत है, जबकि दूसरे का नाम निखिल प्रियदर्शी। निखिल एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी का बेटा है और ऑटोमोबाइल व्यवसायी भी। वह फिलहाल फरार है। लड़की ने इन लोगों पर सेक्स रैकेट चलाने और उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया है।

निखिल प्रियदर्शी एक सेवानिवृत आईएएस अधिकारी का बेटा है।

इस मामले में तीसरे आरोपी हैं वरिष्ठ कांग्रेस नेता ब्रजेश पांडे। वह बिहार में कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष हैं। वह पूर्वी चम्पारण से कांग्रेस के टिकट पर वर्ष 2015 में चुनाव मैदान में उतर चुके हैं, लेकिन हार गए थे।

ब्रजेश पांडेय बिहार में कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष रहे हैं। अब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।

इन लोगों पर प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेन्सेज (POSCO) के तहत मामला दर्ज किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले की शिकायत पिछले साल 22 दिसम्बर को पटना के SC/ST पुलिस थाने में दर्ज की गई थी।

इस मामले का एक दूसरा पहलू यह है कि ब्रजेश पांडेय का संबंध वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार से है। ट्वीटर और फेसबुक पर वायरल हो रहे संदेशों में उन्हें रवीश कुमार का भाई बताया जाता है।


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इस मामले की जांच के क्रम में सीआईडी-एसआईटी कीटीम ने ब्रजेश पांडेय के घर पर छापा मारा, लेकिन वह फरार हो गए। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पांडेय ने इसे अपने खिलाफ षडयंत्र करार दिया है। हालांकि, उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

अपने इस्तीफे में ब्रजेश ने लिखा हैः

“साजिश के तहत गंदे और घिनौने आरोप में फंसाने की कोशिश हो रही है। लड़की ने पुलिस के सामने बयान दर्ज कराया था। इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग हुई थी। उसने मेरा नाम नहीं लिया। एफआईआर में भी नाम नहीं है।”

इस बीच, वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने पूरे घटनाक्रम को रवीश के खिलाफ बौखहालट भरी खुन्नस करार दिया है।

ओम थानवी ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा हैः

वहीं, रवीश कुमार के समर्थन में पत्रकारिता जगत का एक बड़ा वर्ग है। इस मामले की परिणति जो भी हो, इसमें वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार का नाम घसीटा जाना उचित नहीं है। उनकी पत्रकारिता से वैचारिक स्तर पर विरोधाभास हो सकता है, लेकिन भाई के मामले को लेकर उन पर आक्षेप निहायत ही गलत है। न्याय को इस मामले में अपना काम करने देना चाहिए।

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