अमेरिका में कम्प्यूटर प्रोग्रामर्स को नहीं मिलेगा H-1B वीजा, ट्रम्प सरकार की सख्ती

author image
Updated on 4 Apr, 2017 at 1:39 pm

Advertisement

अमेरिका में अब भारतीय कम्प्यूटर प्रोग्रामर्स एच-1बी वीजा नहीं हासिल कर सकेंगे। साथ ही इस वीजा के इच्छुक लोगों को यह साबित करना होगा कि उनका काम वाकई में कठिन है और इसके लिए एडवान्स्ड नॉलेज की जरूरत है।

ट्रम्प सरकार की नई प्रभावी नीति से भारतीय आईटी कंपनियां अधिक प्रभावित होंगी, जो अपने प्रोफेशनल्स को अमेरिका भेजने के लिए इस वीजा का इस्तेमाल करती रही हैं।

ट्रम्प सरकार का मानना है कि इस सख्ती से एच-1बी वीजा फ्रॉड और इसके गलत इस्तेमाल से निपटा जा सकेगा। ट्रम्प सरकार ने हाल ही में ‘रिसेशन ऑफ द दि‍संबर 22, 2000, गाइडलाइन मेमो ऑन H-1B कम्प्‍यूटर रिलेटेड पोजि‍शन’ नाम से पॉलि‍सी मेमोरेंडम जारी कि‍या था।


Advertisement

ट्रम्प सरकार का यह ऐलान उस वक्त सामने आया है, जब एच-1बी वीजा देने के लिए एप्लिकेशन एक्सेप्ट की जा रही हैं। इससे पहले माना जा रहा था कि ट्रम्प प्रशासन एच-1बी वीजा के मामले में भारतीयों पर सख्ती कम करेगा। इस बारे में मोदी सरकार ने भी अमेरिका में रह रहे प्रोफेशनल्स को आश्वस्त किया था।

यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस (USCIS) ने नए नियमों का ऐलान करते हुए कहा है कि इसका मकसद एच-1बी वीजा के गलत इस्तेमाल को रोकना है। इससे अमेरिकी कंपनियों को हाइली स्किल्ड विदेशियों को अप्वाइंट करने में मदद मिलेगी।

फिलहाल, अमेरिका में क्वालीफाइड कर्मचारियों की भारी कमी है। स्थानीय लोग आरोप लगाते रहे हैं कि एच-1बी वीजा की वजह से उन्हें नौकरियों में नजरअंदाज कर दिया जाता है।

Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement