इस आम आदमी ने खोया मैकबुक लैपटॉप लौटाकर कायम की इमानदारी की मिसाल

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Updated on 15 Jun, 2016 at 2:26 pm

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मुंबई सपनों का शहर है। मुंबई संघर्ष का शहर है। इस शहर में संघर्ष क्या होता है, वह आपको लोकल ट्रेन्स में पता चलता है। ट्रेन की प्रतीक्षा, भारी भीड़ के दौरान इसमें घुसना और फिर भीड़ में ही गंतव्य तक पहुंचना अपने-आप में एक कठिन संघर्ष होता है।

मुंबई लोकल के दैनिक यात्री लेखक अम्बरीश रायचौधरी के लिए संघर्ष की यह यात्रा और बुरी साबित हुई, जब वह ट्रेन में अपना मैकबुक लैपटॉप भूल गए।

उन्होंने इस मामले में रेलवे पुलिस में शिकायत दर्ज की और मदद मांगी, लेकिन इसका नतीजा कुछ भी हासिल नहीं हो सका। अम्बरीश ने ट्वीटर का भी सहारा लिया और लोगों से अपील की कि अगर किसी को यह लैपटॉप मिले तो उन तक पहुंचा दिया जाए।

तभी कुछ ऐसा घटित हुआ जिसके बारे में अम्बरीश रायचौधरी ने सोचा भी नहीं था। किसी ने उनके घर का दरवाजा खटखटाया। जब उन्होंने दरवाजा खोला तो भौचक्का रह गए। दरअसल, दरवाजा खटखटाने वाले व्यक्ति उनके लैपटॉप का बैग लिए था। इस बैग में उनका लैपटॉप सुरक्षित था।

दरवाजे पर खड़े व्यक्ति का नाम था वीरेश नरसिंह केले। वीरेश एक कैटरिंग कंपनी में हाउसकीपर का काम करते हैं। उन्हें पनवेल कारशेड में ट्रेनों की सफाई की जिम्मेदारी दी गई है।

अम्बरीश ने इस बारे में पूरी जानकारी फेसबुक पोस्ट के जरिए दी।

जब अम्बरीश ने कुछ रुपए देने की कोशिश की, तो वीरेश ने लेने से मना कर दिया। दोनों दोस्त बन गए।

अम्बरीश ने इस बारे में ट्वीट किया, जिसमें रेलमंत्री सुरेश प्रभु को भी टैग किया गया है। इस ट्वीट में रेलमंत्री से आग्रह किया गया है कि वीरेश नरसिंह केले को उनकी इमानदारी के लिए सम्मानित किया जाए।

यह घटना साबित करती है कि मानवता और समर्पण की भावना लोगों में अब भी बाकी है।

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