भगवान को भी नहीं छोड़ा! हनुमान जी दलित, श्रीकृष्ण OBC और श्रीराम को क्षत्रिय कह डाला

Updated on 30 Nov, 2018 at 7:42 pm

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राजनीतिक फ़ायदे के लिए हमारे नेतागण मशहूर हस्तियों ही नहीं भगवान तक का नाम इस्तेमाल करने से परहेज़ नहीं करते। अब तो हनुमान जी भी सियासी चपेट में आ चुके हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में हनुमान जी को दलित बताया था, बस फिर गया, इस पर भी राजनीति शुरू हो गई है।

इस मामले में हैरानी की बात ये है योगी जी के पार्टी के लोग ही इस मसले पर राजनीति कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री सत्यपाल चौधरी कह रहे हैं भगवान राम और हनुमान के समय जाति व्यवस्था नहीं थी, वर्ण व्यवस्था थी इसलिए हनुमान आर्य थे। जबकि उनकी ही पार्टी के ज्ञानदेव आहुजा ने तो हद ही कर दी, वो तो भगवान का मज़ाक उड़ाने से भी पीछे नहीं हटे।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (cm yogi adityanath)

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एक वीडियो में ज्ञानदेव ने पहले तो हनुमान जी के जयकारे लगाए, फिर उन्हें घोटेवाला सांड कहकर ज़ोर से हंसने लगे।  वहीं गुजरात विधानसभा स्पीकर राजेंद्र त्रिवेदी ने भगवान कृष्ण को ओबीसी समुदाय का बता डाला, तो वहीं राम को क्षत्रिय कह डाला। भगवान के नाम पर सत्ता की जो रोटियां सेंकी जा रही है, वो बेहद शर्मनाक है।

 

 

उधर साधु-संतो ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान की आलोचना की है क्योंकि इस तरह से भगवान के नाम पर सियासत करने से न सिर्फ़ धार्मिक सौहार्द बिगड़ेगा, बल्कि ये किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। धर्म और ईश्वर लोगों की आस्था से जुड़ा मसला है, इसका सियासी इस्तेमाल गलत है, लेकिन हमारे नेताओं को कौन समझाए। आम जनता के लिए ज़रूरी मुद्दों के बारे में बात करने की बजाय फ़ालतू की बातें करके विवाद बढ़ाने में तो इन्हें महारत हासिल है।

 

राजनेताओं की इस जात-पात की सियासत पर भी लोगों का जमकर गुस्सा फूट रहा है।

 

 

ये नीचे वाली तस्वीर आप देख रहे हैं! ये तस्वीर एक बुज़ुर्गकी है, जो अयोध्या में हुई रैली के दौरान अपने लिए, अपने परिवार के लिए फेंके गए खाने के पैकेट्स में से पुड़ी बटोर रहा है। अब इस इन्सान को जात-पात और मंदिर-मस्जिद से क्या मतलब है। जात-पात की राजनीति से ऊपर उठकर अगर लोगों को दो वक्त की रोटी नसीब कराई जाए तो इससे बड़ा पुण्य का काम और भला क्या हो सकता है।

 

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