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कभी बेबसी पर उड़ा था मज़ाक, अब क्लीनर पर हो रही है तोहफे की बारिश

Published on 16 December, 2016 at 11:37 am By

खुशियों का अगर सचमुच आनंद उठना हो तो उन्हे बाँटिए। कोई ज़रूरी नही की आप उन्हे जानते हो या पहचानते भी हो। दरअसल किसी के चेहरे की मुस्कान की वजह बन जाना भी तो सबसे बड़ा आनंद ही है। वो भी तब जब किसी के ना-उम्मीदी के सपने किसी राह में उलझे हों और आपका करुणा-घुलित मन उसे सरलता से सुलझा कर  खुशियों के धागे में गूँथ दे।


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अब्दुल्ला अल काहतानी जो की ट्विटर पर इंसानियत नाम से हैं उन्होने कुछ दिन पहले ही एक क्लीनर, जो की सोने के आभूषण को शोरुम के बाहर, बड़ी लालायित नज़रों से देख रहा है, उसकी ऐसी फोटो क़ैद कर इंस्टाग्राम पर डाल दी। और इस फोटो के संबंध में लिखा कि,

“यह आदमी केवल कूड़ा देखने का ही हकदार हैं।”

इंस्टाग्राम पर यह पोस्ट देखनेवालो के लिए दिल दुखाने वाला था। वो उस क्लीनर की खुशी और ख्वाब में उलझती आँखो के बीच उस शोरुम के शीशे की बेबसी देख चुके थे।

फिर क्या इंस्टाग्राम पर उस क्लीनर के लिए ऐसा वेदना भरा पोस्ट डालने वाले उस आदमी को, खुशियों का असल मतलब सिखाने हज़ारों यूज़र्स करुणा की आवाज़ बन गये। देखते देखते ऐसी फोटो डालने वाले अब्दुल्ला अल काहतानी के पास हज़ारों मेल और फोन आने लगे। फिर जो हुआ उसे तो खुशनुमा होना ही था।

हज़ारों लोगों से मिल रहे समर्थन के बाद अब्दुल्ला अल काहतानी ने यह फ़ैसला लिया कि वह तस्वीर में दिख रहे आदमी को खोज निकालेंगे। अब्दुल्ला ने एक ट्वीट कर और लोगों से भी मदद माँगी और ट्वीट के महज 3 घंटे बाद उस आदमी को ढूँढ निकाला गया।

तस्वीर में नज़ेर अल इस्लाम अब्दुल करीम है जो बांग्लादेश के रहने वाले हैं और एक क्लीनर के रूप में रियाद में काम करते हैं।  ट्विटर पर जब काहतानी ने करीम की दुबारा तस्वीर पोस्ट की थी तो उनको अनगिनत ऐसे संदेश मिले जो करीम की मदद करना चाहते थे।  काहतानी बताते हैं कि,



“कुछ लोग सोने के सेट, तो दूसरों नकद, आईफ़ोन और सैमसंग गैलेक्सी फोन जैसे भेंट देना चाहते थे। यहां तक कि एक चावल कंपनी नेज़र अल-इस्लाम को चावल का एक बैग भेंट करना चाहती थी।”

वही 65 साल के करीम को तो यह भी नहीं पता था कि उनकी तस्वीर ली जा रही है। उन्होने सीएनएन को बताया कि,

“मैने सिर्फ़ एक फ्लैश देखा था। लेकिन ये किसलिए था मुझे नही पता। बादमे मैंने सुना कि मेरी तस्वीर मीडिया में आ गयी है। मैं तो सिर्फ नगर पालिका में एक क्लीनर के रूप में अपना काम कर रहा था तभी मैं उस सोने की दुकान के सामने पाया गया हूँगा। मैं इतने उपहारों और बहुत सारा आभार के लिए बहुत खुश हूं। “

खुश होना भी चाहिए करीम को क्योकि कल तक जिस लाचारी के साथ वह उस सोने के आभूषण को निहार रहे थे वो अब उनका हो चुका है। दरअसल ट्विटर के ही माध्यम से जब सऊदी स्पोर्ट्स चैनल के एक काम करने वाले एक कर्मचारी तुर्की अल डाजम को पता चला तो उन्होने करीम से मिलकर उनके पसंद की एक सोने का सेट भेंट किया, जिसका एक वीडियो स्नॅप चैट पर भी सांझा किया।  जिसमें अब करीम के चेहरे पर बेबसी नही बल्कि खुशी झलक रही है।


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देखा आपने कि कैसे कोई अजनबी किसी की खुशियों का गुच्छा बन जाता है। उम्मीद बनाए रखिए खुशियाँ आपके आसपास, आपके एक नज़र के इंतेज़ार में ही खड़ी हैं।


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