आप बुढ़ापे को कह सकते हैं बाई-बाई, एम्स के चिकित्सकों ने किया करामात

Updated on 3 Oct, 2018 at 1:55 pm

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शरीर में उम्र के साथ बदलाव होता रहता है और ऐसे ही जीवन चक्र चलता है। हम सबको बुढ़ापे से भय लगता है। स्वाभाविक है कि उम्र बढ़ने के साथ ही शारीरिक दुर्बलता और क्षीणता से लोग ग्रसित हो जाते हैं। यही क्रम धीरे-धीरे जीवन की समाप्ति की दिशा में बढ़ता जाता है। लिहाजा बुढ़ापा शारीरिक विकृतियों और बीमारियों की वजह से परेशानी भरा होता है। इस दिशा में एम्स के चिकित्सकों ने सकारात्मक पहल करते हुए एक शोध किया है।

 

शोध परिणाम को अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल (बीएमजे जेरियाट्रिक) में प्रकाशित किया गया है।

 

 


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शोध में इस बात पर प्रकाश दिया गया है कि नॉर्डिक वॉक का अभ्यास व पूरक पोषाहार के प्रयोग से लंबे समय तक बुढ़ापे को खुद से दूर रखा जा सकता है। बता दें कि डॉक्टरों ने 60 वर्ष से अधिक उम्र के 66 लोगों पर अध्ययन किया है। ये सभी बुजुर्ग 75 या उससे अधिक उम्र के थे। इन्हें तीन वर्गों में बांटकर फिर अध्ययन किया गया। ये सभी एम्स की ओपीडी में विभिन्न बीमारियों से ग्रसित होकर उपचार के लिए आये थे। बताया गया है कि 45.45 प्रतिशत बुजुर्ग कुपोषण से पीड़ित थे।

 

 

इन बुजुर्गों को 12 सप्ताह तक 36 बार नॉर्डिक वॉक के लिए प्रशिक्षित किया गया। साथ ही उन्हें पोषक आहार भी दी गए। इसका परिणाम ये हुआ कि उनके लड़खड़ाते कदम तेजी से चलने लगे। विशेषज्ञ डॉ. प्रसून चटर्जी कहते हैं कि यदि बुजुर्गों को नॉर्डिक वॉक कराते हुए प्रोटीन युक्त पूरक पोषाहार दें तो परिणाम और बेहतर आएंगे।

 

पोषक आहार के साथ नॉर्डिक वॉक बुढ़ापे को मात देने का कामयाब प्रयास सिद्ध हो सकता है!

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