“सिनेमाघर में राष्ट्रगान के समय खड़ा होना जरूरी नहीं”

Updated on 24 Oct, 2017 at 12:26 pm

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिनेमाघर में राष्ट्रगान के समय खड़ा होना जरूरी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति राष्ट्रगान के लिए खड़ा नहीं होता है तो ऐसा नहीं माना जा सकता कि वह कम देशभक्त है। कोर्ट की यह टिप्पणी इसलिए भी खास है क्योंकि दिसंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने ही एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सिनेमाघरों में शो से पहले राष्ट्रगान बजाने की कवायद शुरू की थी।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि समाज को नैतिक पहरेदारी की आवश्यकता नहीं है। इस खंडपीठ का कहना था कि अगर राष्ट्रगान के लिए खड़ा नहीं होने को राष्ट्रगान का अपमान माना जाएगा तो अगली बार सरकार चाहेगी कि लोग सिनेमाघरों में टी शर्ट्स और शार्ट्स में नहीं जाएं क्योंकि इससे राष्ट्रगान का अपमान होगा।

सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रखते हुए अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि भारत एक विविधता वाला देश है। एकरूपता लाने के लिए सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाना आवश्यक है।



सिनेमाघरों में राष्ट्र गान बजाने के आदेश

पिछले साल एक दिसंबर को श्याम नारायण चोकसी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्र गान बजाने और दर्शकों को सम्मान में खड़े होने का आदेश के आदेश जारी किए थे।

अब पीठ ने संकेत दिया कि वह एक दिसंबर, 2016 के अपने आदेश में सुधार कर सकती है।


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