श्रीलंका के बाद अब बांग्लादेश को चंगुल में फंसा रहा चीन, बन गया है बर्बादी का प्‍लान

Updated on 19 Jun, 2017 at 9:59 am

Advertisement

चीन ने अब बांग्लादेश पर अब कर्ज जाल फेंका। पिछले वर्ष अक्‍टूबर में चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग अपनी बांग्‍लादेश की यात्रा पर गए थे। यहां पर चीन ने बांग्‍लादेश की सूरत बदलने के मकसद से बड़े पैमाने पर कई इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट्स के लिए कर्ज दिया, लेकिन इसी दौरे पर चीन ने बांग्‍लादेश की बर्बादी का एक ऐसा प्‍लान तैयार कर डाला था, जिसके बारे में उसने कभी नहीं सोचा होगा।

चीन ने बांग्‍लादेश को ऑफर दिया है कि वह सॉफ्ट लोन को कमर्शियल क्रेडिट में बदल दे। सॉफ्ट लोन को क्रेडिट में बदलने पर बांग्‍लादेश को कर्ज के लिए बहुत ही ऊंची ब्‍याज दरें अदा करनी होंगी। पिछले वर्ष अक्‍टूबर में चीनी राष्‍ट्रपति जिनपिंग, ढाका पहुंचे थे और यहां पर बांग्‍लादेश ने चीन के साथ करीब ढाई दर्जन प्रोजेक्‍ट्स के लिए 25 बिलियन डॉलर की डील साइन की थीं।

ढाका में चीनी काउन्सुलेट में बतौर आर्थिक और वाणिज्यिक काउंसलर तैनात ली गुआनगुंजुन की ओर से यह प्रस्‍ताव हाल ही में ज्‍वॉइन्‍ट इकोनॉमिक काउंसिल के दौरान दिया गया। वहीं, बांग्‍लादेश की ओर से इस प्रस्‍ताव का विरोध हो रहा है। चीन का कहना है कि इस बात का वादा नहीं किया गया था कि सभी प्रोजेक्‍ट्स जिन पर राष्‍ट्रपति के दौरे पर साइन हुआ था, उन्‍हें जी2जी यानी गर्वनमेंट टू गवर्नमेंट के आधार पर लागू किया जाएगा। इसलिए चीन की ओर से सॉफ्ट लोन को कमर्शियल बेसिस पर बदलने का प्रस्‍ताव दिया गया।




Advertisement

ईआरडी के एडीशनल सेक्रटरी शाह मोहम्‍मद अमीनुल हक का कहना है कि जी2जी समझौते के तहत किसी भी तरह के फंड का वादा करने का मतलब ही है कि वह सॉफ्ट लोन है। उन्‍होंने कहा कि यह बात उन्‍होंने पहले ही चीनी प्रतिनिधिमंडल को बता दी थी कि बांग्‍लादेश किसी भी तरह के कमर्शियल लोन के लिए तैयार नहीं हैं। क्‍योंकि सभी समझौतों को जी2जी के आधार पर साइन किया गया, इसलिए ही इसे सॉफ्ट लोन के तौर पर ट्रीट करना चाहिए। उनका कहना था कि जब बांग्‍लादेश ने अपनी स्थिति साफ कर दी थी तो चीन का रुख नरम हो गया था।

वन बेल्‍ट वन रोड प्रोजेक्‍ट के जरिए चीन बाकी के एशियाई देशों, अफ्रीका और यूरोप से जुड़ेगा। इस प्रोजेक्‍ट के लिए लोन पैटर्न को बदलने की चीन के पहल का बांग्‍लादेश ने विरोध किया है, क्‍योंकि इससे बांग्‍लादेश को अधिक ब्‍याज का भुगतान करना होगा और इसकी हालत भी श्रीलंका की तरह हो जाएगी और यह कर्ज के दलदल में फंस सकता है।


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement