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बिना हथियार के इस बार चीन ‘वॉटर बम’ से कर सकता है हमला !

11:49 am 24 Aug, 2017

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भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ महीनों से तल्खी कुछ ज़्यादा ही बढ़ गई है। डोकलाम विवाद के बाद तनातनी इस कदर बढ़ गई है कि देश पर युद्ध का संकट मंडराने लगा है। हाल ही में विदेश मंत्रालय ने खुलासा किया कि चीन पिछले तीन महीने यानी मई से ही वॉटर डाटा साझा नहीं कर रहा है।

चीन का रवैया किसी खतरे की आहट भी हो सकता है।

दरअसल, सालों से चीन भारत से वॉटर डाटा यानी पानी के बारे में आंकड़े साझा करता रहा है। इन दिनों पूर्वोत्तर सहित बिहार-बंगाल बाढ़ से जूझ रहे हैं, लेकिन चीन ने अब तक यह आंकड़े साझा नहीं किये हैं कि कितना पानी तिब्बत से निकलने वाली नदियों में छोड़ा जा रहा है।


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पर्यावरण विशेषज्ञ और सामरिक कूटनीतिकार कहते हैं कि ऐसा कर चीन भारत पर परोक्ष रूप से वॉटर बम फोड़ना चाहता है। चीन ने भारत आने वाली नदियों पर चुपचाप कई बांध बना रखे हैं जो भारतीय भौगोलिक क्षेत्र के लिए बहुत बड़ा खतरा है।

चीन के पास तिब्बत एक बड़ा हथियार है।

यह चीन के आर्थिक विकास का सबसे बड़ा औजार है। तिब्बत  से ही एशिया की अधिकांश बड़ी नदियां निकलती हैं, जो भारत समेत अन्य देशों में बहती हैं। भारत में भी तीन बड़ी नदी तिब्बत से निकलती हैं। पहली सबसे बड़ी नदी ब्रह्मपुत्रा है, जिस पर चीन ने कई बांध बना रखे हैं। 2700 किलोमीटर लंबी यह नदी भारत में अरुणाचल प्रदेश और असम होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है और बंगाल की खाड़ी में गिरती है। जानकारों का मानना है कि चीन इस नदी का इस्तेमाल भारत के खिलाफ वॉटर बम के रूप में कर सकता है। यदि चीन ने ब्रह्मपुत्र पर बने बांध को खोल दिया तो पूर्वोत्तर भारत में जल प्रलय आ सकता है।

दूसरी बड़ी नदी सतलुज है, जो तिब्बत से निकलकर हिमाचल प्रदेश और पंजाब से गुजरते हुए पाकिस्तान में सिंधु नदी की सहायक नदी बन जाती है। इस पर भाखड़ा नांगल डैम बना है। तीसरी नदीं सिंधु है जो कश्मीर होते हुए पाकिस्तान में जाकर बहती है और अरब सागर में मिलती है। यदि चीन ने इन नदियों पर बने बांध को खोल दिया तो उत्तरी भारत के कई राज्यों में जल प्रलय आ सकता है।

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