जानिए क्यों चीन के बेकार सोलर पैनल्स पर्यावरण के लिए बड़ी समस्या बनने जा रहे हैं!

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Updated on 31 Jul, 2017 at 1:47 pm

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दुनिया भर में ऊर्जा के लिए तेल और कोयले पर निर्भरता कम करने की कवायद चल रही है। पूरी दुनिया में सौर ऊर्जा से लेकर पवन ऊर्जा के इस्तेमाल पर बड़े पैमाने पर काम चल रहा है। जहां तक सोलर पैनल्स की बात है तो इसमें ऊर्जा की बहुत संभावनाएं है।

चीन में पांडा की शक्ल में बना यह सोलर पैनल दुनियाभर में वाहवाही बटोर रहा था।

लेकिन अब यही सोलर पैनल्स चीन में पर्यावरण के लिए एक बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं। दरअसल, बड़ी समस्या पुराने पड़ रहे सोलर पैनल्स की वजह से उपजी है। एक सोलर पैनल की औसत आयु करीब 20 से 25 तक होती है। समस्या यह है कि पुराने सोलर पैनल्स का क्या किया जाए।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट में चाइना रिन्युबल इनर्जी सोसायटी के महासचिव लु फांग के हवाले से बताया गया है कि वर्ष 2034 तक करीब 70 गीगावाट बिजली का उत्पादन करने वाले सोलर पैनल्स रिटायर कर दिए जाएंगे। वहीं, वर्ष 2050 तक करीब 2 करोड़ टन से अधिक सोलर पैनल और बेकार हो जाएंगे। इन बेकार सोलर पैनल्स का वजन एफिल टावर से करीब 2 हजार गुना अधिक होगा।

सौर ऊर्जा के मामले में चीन अग्रणी है। यहां दुनिया के बड़े सोलर पावर प्लान्ट्स लगे हुए हैं, जिनसे करीब 80 गीगावाट बिजली का उत्पादन होता है।

चीन के जियांग्सु प्रान्त में रिसायकलिंग कंपनी नानजिंग फैंगरुन मैटियल बेकार हो चुके सोलर पैनल्स की रिसायकलिंग करती है। इसके महाप्रबंधक तियान मिन ने चीन के सौर ऊर्जा उद्योग की तुलना एक टाइम बम के साथ की है।


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मिन कहते हैंः

“यह एक टाइम बम है। करीब दो से तीन दशक बाद यह पूरी ताकत से साथ फटेगा और पर्यावरण को तबाह कर देगा। कचरे की मात्रा इतनी अधिक होगी कि रिसायकिल करना मुश्किल होगा।”

सोलर पैनल शीशा, तांबा और अल्युमीनियम सरीखे मैटल्स से बने होते हैं। साथ ही इनमें विशेष क्रिस्टल सिलीकॉन का भी उपयोग होता है।

चीन में अधिकतर सोलर पैनल इसी तरह के होते हैं, जो सस्ते होते हैं। देश के दूरदराज वाले ग्रामीण इलाकों में इन पैनल्स से बड़ी मात्रा में बिजली बनाई जा रही है।

यूरोप में कुछ कंपनियों ने ऐसी तकनीक का विकास कर लिया है, जिसके तहत एक सोलर पैनल का 90 फीसदी हिस्सा तक रिसायकिल किया जा सकता है। हालांकि, इसकी लागत अधिक है और चीन सोलर पैनल्स पर इतना पैसा खर्च नहीं कर सकता।

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