दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी समुद्री झील है चिल्का

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Updated on 8 Dec, 2015 at 6:01 pm

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समुद्री अप्रवाही जल में बनी चिल्का झील भारत की सबसे बड़ी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी समुद्री झील है। उड़ीसा के पुरी जिले में स्थित यह एक छिछली झील है, जिसका निर्माण महानदी द्वारा लाई गई मिट्टी के जमा होने से हुआ है। इस प्रसिद्ध झील का पानी दिसम्बर से जून तक खारा रहता है, लेकिन बारिश के मौसम में इसका जल मीठा हो जाता है। इसकी औसत गहराई 3 मीटर है।

जैव विविधताओं से भरपूर है चिल्का

यह झील जैव विविधताओं से भरपूर है। यहां मछलियों की अलग-अलग तरह की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। यही नहीं, यह झील आसपास के 132 गांवों में 150,000 रहने वाले मछुआरों की आजीविका का साधन भी है, जो सीधे तौर पर इससे जुड़े हुए हैं।

यहां मौजूद हैं पक्षियों की 160 प्रजातियां


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चिल्का झील को प्रवासी पक्षियों के लिए स्वर्ग माना जाता है। यहां दुनिया के अन्य हिस्सों से हजारों किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद पक्षी पहुंचते हैं। कैस्पियन सागर से लेकर मध्य एशिया के पक्षी यहां प्रवास पर देखे जा सकते हैं। एक सर्वेक्षण में कहा गया है कि यहां 45 फीसदी सामान्य पक्षी, 32 फीसदी जलपक्षी और 23 फीसदी बगुले हैं।

यहां पलती हैं डॉल्फिन की प्रजातियां

इस झील में डॉल्फिन मछली की कई प्रजातियां भी पलती हैं, जिनमें अधिकतर को लुप्तप्राय माना जा रहा है। जीव विशेषज्ञों का कहना है कि यहां 37 प्रकार के सरीसृपों और उभयचरों का भी निवास स्थान है।

इसके अलावा लघु शैवाल, समुद्री घास, समुद्री बीज, झींगे आदि चिल्का झील के खारे जल में फलते-फूलते हैं।

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