बच्चों को लैपटॉप-फोन से रखें दूर, वरना एक दिन वो पेंसिल भी ढंग से नहीं पकड़ पाएंगे

Updated on 28 Feb, 2018 at 10:28 pm

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दुनिया बड़ी तेजी से आगे बढ़ रही है। हम लोग उससे कदमताल कर चलने की कोशिश करते हैं और ये एक हद तक ठीक भी है। लेकिन इसमें भी एक नियंत्रण जरूरी होता है। यहां हम आधुनिक होती युवा पीढ़ी की बात कर रहे हैं। तकनीक के इस्तेमाल से जीवन को सहज करना गलत नहीं है, लेकिन इसकी लत पाल लेना बिलकुल भी ठीक नहीं है।

पहले जहां हम कुछ लिखने के लिए पेंसिल या पेन का इस्तेमाल करते थे अब मोबाइल पर या टेबलेट पर ही लिख लेते हैं। आज के बच्चों में भी यही आदत पनप रही है। छोटी उम्र में ही उनके हाथों में माता-पिता मोबाइल या टेबलेट थमा देते हैं, जिसके कारण वे बच्चे टचस्क्रीन टेक्नोलॉजी के इतने ज़्यादा आदी हो चुके हैं कि वो पेन और पेंसिल को अच्छी से पकड़ ही नहीं पाते। यही उनकी उंगलियों की मांसपेशियों के कमजोर होने का कारण बनता है।

 

तकनीक बच्चों को जितना शिक्षित करता है, उतना ही अधिक नुकसान भी पहुंचाता है। यह बच्चों के लिए घातक साबित हो सकता है। वैज्ञानिकों का स्पष्ट कहना है कि तकनीक के आदी बच्चे पेंसिल पकड़ने में अक्षम हो सकते हैं। टच स्क्रीन से उनके उंगलियों की मांसपेशियां भी कमज़ोर हो जाती हैं।

 

इंग्लैंड के एनएचएस फाउंडेशन के प्रमुख सैली पेने के अनुसार, स्कूल में प्रवेश लेनेवाले बच्चों को पेन्सिल दी जा रही है लेकिन वे इसे कमजोरी के कारण पकड़ नहीं पाते हैं। दरअसल, मोबाइल के आदी बच्चे के अंदर फ़ंडामेंटल मूवमेंट्स का अभाव होता है। पेंसिल को पकड़ने और लिखने के लिए मांसपेशियां मजबूत होनी चाहिए।


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वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर बच्चों को ट्रेडिशनल एक्टिविटी और खिलौने पकड़ाए जाए तो इससे उनकी ऊंगलियों को मजबूती मिलती है। पेन और पेंसिल भी उँगलियों की एक्सरसाइज कराने का काम करता है। बाल विशेषज्ञ बार्बी के अनुसार इसी बातों को गौर करते हुए पेन और पेंसिल के इस्तेमाल पर जोर दिया जाता है।

 

 

घर में बच्चे हैं तो इन बातों पर ध्यान देना जरूरी है। बच्चों को उनके विकास के लिए डिजिटल दुनिया से दूर रखना ही बेहतर है।

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