बचपन की ये 9 आदतें आपके पूरे जीवन को बदल सकती हैं, रहेंगे तनावमुक्त और स्वस्थ

Updated on 26 Feb, 2018 at 7:54 pm

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बचपन में हमें कई चीजों का शौक रहता है और हम जल्दी से जल्दी बड़ा होकर आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं। लेकिन जब बड़े होते हैं तो ये आत्मनिर्भरता कब मजबूरी बन जाती है और फिर तनाव के आगोश में हमारा सुख-चैन चला जाता है, इसका पता भी नहीं चल पाता है। बड़ा होकर पता चलता है कि बचपन ही अच्छा था।

 

ये जान लें कि बचपन की कुछ आदतों को अब भी अपनाकर आप अपना तनाव कम कर सकते हैं।

 


 
 

1. छोटी-छोटी चीज़ों में खोजें खुशी

 

जिस तरह बचपन में हम छोटी-छोटी चीजों से खुश होते थे, वैसे ही अब भी खुश होना सीखें। जैसे मां के हाथ का खाना, समय निकालकर खेलना, पेंटिंग करना आदि अपनी पसंद को प्राथमिकता दें।

 
 

2. जमकर नींद लें

 

 

नींद की कमी तनाव और चिड़चिड़ापन को जन्म देती है इसलिए पूरी नींद लें। बचपन में हम जल्दी सो जाते थे और पूरी नींद लिया करते थे। लिहाजा टेंशन का नामोनिशान नहीं रहता था। वैसे ही आप आठ घंटे की पूरी नींद लें तो तनावमुक्त हो जाएंगे।
 
 

3. चाय, कॉफी न पीएं

 

बचपन में हम चाय-कॉफ़ी से दूर ही रहते थे या इसकी मनाही थी। वैसे ही अब भी इनसे दूरी बनाएँ३ रखना फायदेमंद ही है। इनकी जगह पर दूध और जूस आदि पेय को लें तो जीवन स्वस्थ्य हो सकता है।
 
 

4. घर का खाना सबसे अच्छा


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बचपन में घर का खाना ही खाते थे। जाहिर है इसलिए भी ज्यादा स्वस्थ रहते थे। बाहर के खाने को बाई बोलकर घर के खाने को तरजीह दें।
 
 

5. किताबों से करें दोस्ती

 

ऐसा अक्सर होता है कि हमें नींद नहीं आती है। बचपन में तो सोने से पहले कहानी सुनना पसंद था। अब भी टीवी या इंटरनेट चलाने से बेहतर है कि आप किताबें पढ़ें।
 
 

6. गुस्सा करना छोड़ दें

 

आपको याद होगा कि हम दोस्तों से रूठते थे और फिर जल्द ही मान जाते थे। ठीक उसी तरह गुस्से को त्याग दें और खुद के साथ दूसरों को भी खुश रखें।
 
 

7. सवाल करने से न हिचकें

 

बचपन में हम सब सवाल पर सवाल किया करते थे, लेकिन जैसे-जैसे बड़े होते हैं, सवाल पूछने से कतराते हैं। सवाल पूछने से मानसिक तनाव कम होता है और समस्याओं के समाधान निकल आते हैं।
 
 

8. दोस्तों से जाकर मिलें

 

सोशल मीडिया के बाहर भी असल दोस्तों से जाकर मिलें। यार-दोस्तों से मिलकर मानसिक तनाव थोड़ा कम होता है।
 
 

9. आउटडोर गेम खेलें

 

मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए खेलना बेहद जरूरी है। बचपन में हम नियमित रूप से मैदान में जाकर खेलते थे, लेकिन अब व्यस्त जीवन शैली के कारण ये बंद ही हो गया। ऐसे में कोशिश करें कि फिर से खेल को अपने जीवन में प्राथमिकता दें।

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