असमय काल के गाल में समा जाते हैं ये कूड़ा बीनने वाले बच्चे, जानिए क्यों?

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Updated on 3 Feb, 2016 at 12:41 am

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राजधानी दिल्ली की सड़कों पर कई बच्चे रोज कूड़ा बीनते मिल जाते हैं। शाम के वक्त दिल्ली के इलाकों में कूड़ा बीनने वाले हाथ में रुमाल लिए और उसे बार-बार सूंघ अपने फेफड़े जलाते नजर आ जाएंगे। नशे में धुत्त ये लोग बमुश्किल ही कुछ बोल पाते हैं।

चुपचाप अपने काम में लगे ये लोग आखिर हैं कौन? ये कहां रहते हैं? इनका कोई घर है या नहीं ?

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कुछ ऐसे ही सवाल इन कूड़ा उठाने वालों को देखकर हमारे जेहन में कौंध जाते हैं, लेकिन इनका जवाब जानने की कोशिश शायद ही कभी हम करते हैं। बहरहाल, ये लोग भी इसी समाज के इसी दुनिया के हैं जिसके हम और आप।

भरपेट भोजन के लिए तरसते इन लोगों की जिंदगी पर गौर करें तो पाते है कि आखिर क्यों ये कूड़ा बीनने वाले लोग आगे क्यों नहीं बढ़ पाते हैं, क्यों कोई दूसरा काम नहीं कर लेते हैं?


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आज इन लोगों की जिन्दगी के बारे में बता रहे हैं कूड़ा बीनने वाले मुकेश कुमार।

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मुकेश कुमार कहते हैंः

“ये कोई दूसरा काम इसलिए नहीं कर सकते हैं, क्योंकि ये लोग नशे की चपेट में बुरी तरह जकड़ चुके होते हैं।”



हालात से मजबूर होकर कूड़ा बीनने वालों की जिन्दगी, कितनी खतरनाक है, इस बात का अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बेहद छोटी उम्र से कूड़ा बीनने वाले भी स्मैक जैसा खतरनाक नशा करते हैं।

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अगर मुकेश की मानें तो कूड़ा बीनने वाले लोग सायकिल की ट्यूब चिपकाने वाले सुलेशन से लेकर स्मैक जैसी भयंकर नशीली चीजों का सेवन करते हैं। मुकेश बताते हैं कि ये सारी ऐसी चीजें हैं जो आसानी से मिल जाती हैं।

ज्यादातर कूड़ा बीनने वालों की मौत बहुत जल्द हो जाती है, जिसका सबसे बड़ा कारण नशा ही है।

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देखें कूड़ा बीनने वाले मुकेश कुमार का वीडियो।


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