‘नाबालिग पत्नी से शारीरिक संबंध’ तब रुकेगा जब बाल विवाह पर पूरी तरह रोक लगेगी!

Updated on 13 Oct, 2017 at 1:54 pm

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हम 21वीं सदी में आकर भी अगर बाल विवाह की बात करें तो बहुत ही अटपटा लगता है। यह एक अभिशाप के रूप में भारतीय समाज में अब भी विद्यमान है। स्थिति भयावह है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2015-16 की रिपोर्ट में में कहा गया है कि बाल वधुओं की सबसे ज्यादा संख्या पश्चिम बंगाल में है, वहीं बिहार दूसरे और झारखंड तीसरे स्थान पर आता है।

क्या कहते हैं आंकड़े

पश्चिम बंगाल में बाल वधुओं की संख्या 40.7 फीसदी, बिहार में 39 फीसदी व झारखंड में क्रमशः 38 फीसदी है। इस मामले में पंजाब व केरल सबसे बेहतर स्थिति में हैं। यहां मात्र 7 फीसद बाल बधुएं हैं। इस रिपोर्ट की चर्चा सुप्रीम कोर्ट ने भी की है।

सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा फैसले में कहा गया था कि नाबालिग पत्नी से शारीरिक संबंध बनाना दुष्कर्म माना जाएगा। इस जुर्म पर दस साल की सजा निश्चित की गई है।


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जस्टिस मदन बी लोकुर व दीपक गुप्ता की बेंच ने बुधवार को यह फैसला दिया था। कोर्ट का मानना था कि नाबालिग से संबंध बनाना पोक्सो एक्ट के तहत अपराध मनाना जाएगा। वर्ल्ड बैंक भी भारत के इस कुप्रथा पर अपनी चिंता जता चुका है।

भारत में लगभग दो करोड़ तीस लाख बाल वधुएं हैं।

2011 की जनगणना को आधार बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि भारत में तीन फीसदी लड़कियों की शादी 10 से 14 साल के बीच हो जाती है, जो चिंता का विषय है। वहीं, 20 फीसदी लड़कियां 18 साल की उम्र से पहले ही शादीशुदा हो जाती हैं। 2005-06 के आंकड़े से तुलना की जाय तो इसका प्रचालन कम हुआ है। पहले ये आंकड़ा लगभग 47.4 फीसद का था।

तमाम रिपोर्ट्स के आधार पर कहा जा सकता है कि नाबालिग से शारीरिक संबंध की घटनाएं तभी रुक सकती हैं जब बाल विवाह पर पूरी तरह रोक लगे।

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