अच्छी खबरः बाल मजदूरी मुक्त बनने की राह पर अग्रसर है यह जिला

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Updated on 3 Sep, 2016 at 11:12 am

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उड़ीसा के मयूरभंज जिले को कभी गरीबी, पिछड़ेपन और बाल मजदूरी की वजह से जाना जाता था।

गरीबी और पिछड़ेपन की जहां तक बात है तो हालात में कुछ खास बदलाव तो नहीं आया है, लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि मयूरभंज देश का पहला ऐसा जिला बनने जा रहा है, जो बाल-मजदूरी से मुक्त होगा। यहां कोई भी बच्चा बाल मजदूरी करता नहीं मिलेगा।

यह इलाका देश के कुछ सबसे पिछड़े जिलों में शामिल है।

वर्ष 2014 में मयूरभंज जिला बच्चों की शिक्षा के मामले में 100 फीसदी साक्षरता दर वाला जिला बन गया था। खास बात यह है कि इस जिले का प्रत्येक बच्चा स्कूल जाता है। और यही वजह है कि इस जिले में अब बाल मजदूरी का नामोनिशान मिट रहा है।

यह संभव हो सका है, मयूरभंज के जिलाधीश राजेश पाटिल के प्रयासों की वजह से। जी न्यूज की इस रिपोर्ट के मुताबिक, आइएएस अधिकारी पाटिल खुद बाल मजदूर रह चुके हैं।

यही वजह है कि उन्होंने जिलाधीश का पदभार संभालने के बाद इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने की ठान ली।


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आज उनके द्वारा चलाए जा रहे प्रयास और योजनाओं की वजह से यहां के सभी बच्चे स्कूल जाते हैं और जीवन में कुछ बड़ा कर पाने का सपना संजोते हैं।

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