कीमोथेरेपी से खत्म होने की बजाय बढ़ सकता है कैंसर का खतरा !

Updated on 4 Sep, 2017 at 4:43 pm

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अब तक तो आपने भी यही सुना होगा कि कैंसर के इलाज के लिए कीमोथेरेपी ही एकमात्र और सबसे प्रभावी जरिया है, लेकिन अब एक रिसर्च में इलाज के इस तरीके पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल में हुए एक शोध में विशेषज्ञों ने दावा किया है कि कैंसर वाले ट्यूमर को खत्म करने वाले कीमोथेरेपी के प्रभाव से कैंसर के शरीर के अन्य हिस्सो में फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

न्यूयॉर्क स्थित एल्बर्ट आइंस्टीन कॉलेज ऑफ मेडिसिन में हुए शोध में विशेषज्ञों ने देखा कि कीमोथेरेपी कैंसर का कारगर उपचार नहीं है। इससे बस थोड़े दिनों के लिए राहत मिलती है। इतना ही नहीं इसकी वजह से कैंसर दोबारा और आक्रामक रूप से वापसी कर सकता है।


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शोधकर्ताओं का कहना है कि कीमोथेरेपी से ट्यूमर को खत्म करने की कोशिश के साथ-साथ यह नए ट्यूमर के विकसित होने की राह खोलता है। इसके कारण कैंसर गंभीर रूप अख्तियार कर सकता है और इसका इलाज करना पहले से अधिक मुश्किल हो सकता है।

पहले भी हुआ शोध

सिएटल स्थित फ्रेड हचिसन कैंसर रिसर्च सेंटर में 2012 में हुए शोध में विशेषज्ञों ने दावा किया था कि कीमोथेरेपी ने स्वस्थ कोशिकाओं को ट्यूमर के विकास में मदद करने के लिए सक्रिय किया। मानव जीव विज्ञान के प्रोफेसर और शोध के वरिष्ठ लेखक पीटर नेलसन ने कहा कि सैद्धांतिक रूप से कीमोथेरेपी कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने का सटीक तरीका है। हालांकि, उन्होंने कहा कि ट्यूमर को खत्म करने के लिए जरूरी मात्रा मरीजों के लिए नुकसानदेह हो सकती है। लिहाजा डॉक्टरों को इसकी खुराक हल्की करनी होती है, जिसके कारण कैंसर को आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा ट्यूमर कोशिकाओं के जीवित बचने की आशंका बढ़ जाती है। यह कीमोथेरेपी के प्रति प्रतिरोधी होने के साथ ही अन्य अंगों में फैल सकती है।

इस शोध से कैंसर मरीज़ों की चिंता निश्चित तौर पर और बढ़ जाएगी।

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