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कैन्सर के 97 फीसदी मामलों में कीमोथेरेपी काम नहीं करती!

Published on 19 March, 2018 at 4:15 pm By

अमेरिका में कैन्सर मृत्यु का दूसरा सबसे प्रमुख कारण है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यहां वर्ष 2014 में 591,686 लोग कैन्सर की वजह से अपनी जान गंवा बैठे। इन लोगों के कैन्सर का पारंपरिक तरीके से इलाज किया गया था, जिसमें रेडिएशन, कीमोथेरेपी और सर्जरी जैसी प्रक्रिया शामिल रही थी। कैन्सर की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में कीमोथेरेपी प्रमुख है। हालांकि, अधिकतर मामलों में कीमोथेरेपी का फायदा होना तो दूर इससे नुकसान ही अधिक होता है।


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दरअसल, इसके साइड इफेक्ट्स बेहद खतरनाक होते हैं। यह इतना नुकसानदेह होता है कि अधिकतर मामलों में मरीज कैन्सर से नहीं, बल्कि कीमोथेरेपी की वजह से मारे जाते हैं। हाल के दिनों में अमेरिका में ऐसे डॉक्टर सामने आ रहे हैं, जो लगातार कीमोथेरेपी के खतरों के प्रति लोगों को आगाह कर रहे हैं।

पीटर ग्लाइडन ऐसे ही डॉक्टर्स में से एक हैं।

 

 

इस विडियो में ग्लाइडन कहते हैंः

“कीमोथेरेपी के इस्तेमाल का महज एक ही कारण है कि इससे डॉक्टर्स पैसे बनाते हैं। यह 97 फीसदी मामलों में काम नहीं करता।”



ग्लाइडन पूछते हैंः

“अगर फोर्ड मोटर कंपनी एक ऐसा वाहन बनाती है जो 97 बार विस्फोट करे तो क्या इसके बावजूद यह बिजनेस में बनी रहेगी?”

“Neoadjuvant Chemotherapy Induces Breast Cancer Metastasis Through a TMEM-Mediated Mechanism” नामक एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि कैन्सर की पारंपरिक चिकित्सा की वजह से प्राणघातक ट्युमर हो सकते हैं। साथ ही यह बेहद महंगी चिकित्सा प्रक्रिया है।

अमेरिका स्थित अल्बर्ट आइन्सटीन कॉलेज ऑफ मेडिसीन के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि कीमोथेरेपी की वजह से कैन्सर के ट्युमर छोटे जरूर हो सकते हैं, लेकिन ये पूरी तरह खत्म नहीं हो सकते। समय बीतने के साथ ही ये ट्युमर शरीर के अलग-अलग हिस्सों में फैल जाते हैं और बाद में भयावह रूप धारण कर लेते हैं।

कहा जा सकता है कि कैन्सर की बीमारी के दम पर एक बड़ा उद्योग फल-फूल रहा है। बड़ी कंपनियों और सरकारों के लिए जिन्दगियां इतनी महत्वपूर्ण नहीं हैं जितना कि पैसे कमाना।

कीमोथेरेपी कैन्सर का एकमात्र इलाज नहीं है। इसके विकल्प भी हैं।

 


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