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भारतीय राजनीति में इन 10 क्रांतिकारी बदलाव से लोकतंत्र में लोगों की आस्था बढ़ेगी

Published on 10 April, 2018 at 1:07 pm By

तेज़ी से बदलते और विकसित होते विश्व में यदि भारत को भी अन्य देशों के साथ चलना है तो उसे अपने राजनीतिक सिस्टम में बदलाव करना होगा। ऐसा नहीं है कि हमारे पास अच्छे नेता नहीं हैं। यह बात जरूर है कि अच्छे नेताओं की संख्या कम है, जिसे बढ़ाना ज़रूरी है। यह सभी मानते हैं कि भारतीय राजनीति में बदलाव की सख्त जरूरत है। चलिए हम आपको बताते हैं कि आज के दौर में भारतीय नागरिक देश की राजनीति में तत्काल किन-किन बदलावों की अपेक्षा करते हैं।


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1. राजनीति और धर्म का घालमेल बंद हो

राजनीति और धर्म का घालमेल बंद करना चाहिए। सिर्फ़ वोट बैंक बढ़ाने के लिए राजनीति और धर्म के घालमेल से दंगे भड़कने की संभावना ज़्यादा होती है। भारत जैसे देश में धर्म बहुत संवेदनशील मसला है। ऐसे में राजनीति को धर्म से जोड़ने के परिणाम घातक हो सकते हैं। हम इसके नतीजे भी देख रहे हैं।

2. शैक्षणिक योग्यता का निर्धारण

किसी भी तरह की नौकरी के लिए एक शैक्षणिक योग्यता जरूरी होती है। हालांकि, राजनीति में इसकी कोई जरूरत नहीं समझी जाती। आज के जागरूक भारतीय चाहते हैं कि राजनेताओं के लिए भी शैक्षणिक योग्यता का तय होना ज़रूरी है।

3. नम्रता जरूरी है

क्या आपने कभी किसी नेता को माफी मांगते देखा है? शाद कभी-कभार। हालांकि, ज़्यादातर नेताओं को यही लगता है कि वह कभी गलती कर ही नहीं सकते। हमारे नेताओं में विनम्रता की कमी है। इसकी वजह यह भी है कि उनपर मीडिया की नज़र हमेशा रहती है। ऐसे में नेताओं को लगता है कि उनके इस व्यवहार का असर कहीं आगामी चुनावों पर न पड़े। यह समझना होगा कि अच्छा नेता वही होता है जो अपनी गलती की माफी मांगने को हमेशा तैयार रहे।


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4. भड़काऊ भाषण न दें

संविधान के मुताबिक, चुनाव के दौरान नेताओं को नफरत फैलाने और भड़काऊ भाषण देने से बचना चाहिए। हालांकि, राजनीतिक दल और उनके नेता ऐसा नहीं मानते। चुनाव प्रचार के दौरान धर्म विशेष, जाति विशेष पर टिप्पणियां आम हैं। नेताओं को इन सारी चीज़ों की बजाय विकास पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

5. जनप्रतीनिधि जैसा व्यवहार न कि सिर्फ नेताओं जैसा

जेम्स फ्रीमैन क्लार्क ने कहा था कि हमें जनप्रतिनिधि चाहिए, नेता नहीं। जबकि कड़वी हकीकत यह है कि हमारे देश में नेता तो बहुत है, मगर जनप्रितिनिधि नाम मात्र के हैं। दरअसल, लोगों को तेज विकास चाहिए, मगर नेता लोग उन्हें बस विकास का सपना भर दिखाते हैं और फिर जीतने के बाद भूल जाते हैं।



6. एक टीम की तरह काम करने वाला

लोग चाहते हैं कि नेता एक टीम की तरह काम करने वाला होना चाहिए जिसका मकसद देश का विकास हो। इसके लिए उन्हें विरोधी पार्टी से अपने मतभेदों के ऊपर उठकर देशहित में सोचना होगा। हालांकि, ऐसा असल में हो नहीं पा रहा। नेता बस अपने हित के लिए सत्ता में रहने वाली पार्टी का विरोध करते रहते हैं।

7. बेकार की बातें न करे, असल मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने वाला हो

बेकार की बातों पर समय गंवाने के बजाय नेताओं को सही मुद्दों पर बहस करनी चाहिए। हालांकि, ऐसा हो नहीं पाता। कुछ समय पहले एक धर्म विशेष की आबादी बढ़ने पर चिंता जताते हुए दूसरे धर्म के नेता ने अपने धर्म के लोगों से भी आबादी बढ़ाने की अपील की। भारत जैसे देश में जहां जनसंख्या की वजह से पहले ही इतना समस्याएं है, वहां लोगों को आबादी बढ़ाने की सलाह देना क्या सही है?

8. विरोधी पार्टी के अच्छे काम की तारीफ

हमारे देश के राजनेताओं की ये समस्या है कि यदि सत्ता में रहने वाली पार्टी ने कुछ अच्छा काम किया है तो भी उसकी आलोचना ही करेंगे। यह सही नहीं है। यदि सत्ता में होने वाली पार्टी ने वाकई विकास की दिशा में अच्छा काम किया है तो उसके अच्छे काम की तारीफ की जानी चाहिए। साथ ही सत्ता पक्ष को भी विपक्ष द्वारा किए अच्छे काम की सराहना करनी चाहिए।

9. स्वतंत्र संस्थाओं में राजनेताओं की दखलअंदाज़ी न हो

सीबीआई जैसी स्वतंत्र संस्था में राजनेताओं की कोई दखलअंदाज़ी नहीं होनी चाहिए। उन्हें अपने तरीके से काम करने देना चाहिए। हालांकि, हमारे देश में राजनेता रसूख का इस्तेमाल करके सीबीआई जांच को भी अपने हिसाब से मोड़ देते हैं।

10. पैसों के मामले में पारदर्शिता ज़रूरी

राजनीति में पैसा कहां से आता है कहां जाता है, कुछ पता नहीं चलता। नेता कुछ ही साल में करोड़पति बन जाता है। इसलिए राजनीति में पैसों के मामले में पारदर्शिता होनी चाहिए। मिलने वाले फंड और राजनीति में हुए खर्च संबंधी ब्यौरे सावर्जनिक किए जाने चाहिए। राजनीति में आने वाला 70 प्रतिशत धन अनजान स्रोतों से आता है।


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