Topyaps Logo

Topyaps Logo Topyaps Logo Topyaps Logo Topyaps Logo

Topyaps menu

Responsive image

चाणक्य के समय में सिक्के के रूप में था रुपया, जानिए कई और तथ्य

Updated on 28 February, 2017 at 10:34 am By

भारत में रुपए की शुरूआत करीब 2600 साल पहले ही हो गई थी। यह अलग बात है कि उन दिनों रुपया सिक्के की शक्ल में नजर आता था। दरअसल, प्राचीन भारत दुनिया की उन चुनिन्दा सभ्यताओं में शामिल रहा है, जहां ईसा से पहले मुद्राओं का चलन रहा है। यूनान और चीन सरीखी सभ्यताओं में मुद्राओं का चलन बेहद पुराना है।

ये सिक्के मौर्य काल के हैं। इन्हें रुप्यकम कहा जाता था।


Advertisement

मान्यताओं के मुताबिक रुपया शब्द दरअसल संस्कृत शब्द से लिया गया है। संस्कृत में रूपा का अर्थ होता है आकार। इसका सटीक भावार्थ है मुद्रांकित अथवा अंकित किया हुआ। इसी तरह रुपैया का अर्थ होता है चांदी या चांदी जैसा। संस्कृत शब्द रुप्यकम का शाब्दिक अर्थ होता है चांदी के सिक्के।

रुपए का जिक्र न केवल प्राचीन भारतीय साहित्य में मिलता है, बल्कि महान कूटनीतिज्ञ चाणक्य ने अपनी पुस्तक अर्थशास्त्र इसके बारे में लिखा है।

इस पुस्तक में रुपेयरूपा (चांदी का सिक्का), सुवर्णरूपा (सोने का सिक्का), ताम्ररूुपा (ताम्बे का सिक्का) व सिसारूपा (सीसे का सिक्का) शब्दों का जिक्र मिलता है। मौर्यकाल में सिक्कों पर ब्राह्मी लिपि के अलावा कई तरह के चिह्नों व प्रतीयों का इस्तेमाल किया जाता था।

उन दिनों रुपए संभवतः ढलाई विधि से तैयार किए जाते थे। यह विधि अधिक परिष्कृत होती थी जिसमें समय व श्रम दोनों की ही बचत होती थी। तक्षशिला से लेकर नालंदा तक के कई स्थानों में जो खुदाई में सिक्के प्राप्त हुए हैं, वे इस विधि की प्रमाणिकता को साबित करते हैं। ढलाई विधि में सिक्के का निर्माण सांचों की मदद से होता था।

अर्थशास्त्र से यह पता चलता है कि मुद्रा निर्माण पर पूर्णतः राज्य का अधिकार था।



मौर्य वंश की समाप्ति के बाद रुपए का उल्लेख सातवाहन वंश के शासन के दौरान मिलता है। सातवाहन वंश ने मुद्रा निर्माण में एक नया प्रयोग किया। उन्होंने मुद्रा निर्माण के लिए सीसे का प्रयोग शुरू किया।

कई इतिहासकार मानते हैं कि भारतीय सीसे का आयात बाहर से करते थे।

इसके बाद रुपए का उल्लेख मिलता है मध्यकाल में शेरशाह सूरी के शासनकाल के दौरान। शेरशाह ने अपने शासनकाल में 178 कण वजन के चांदी का सिक्का जारी किया, जिसका नाम रखा रुपैया।

आधुनिक भारत में रुपैया रुपया के रूप में प्रचलित हुआ। मुगलकाल से होते हुए यह ब्रिटिश शासनकाल में भी इसी रूप में प्रचलित रहा।

जब पहली बार उतरा कागज का नोट


Advertisement

18वीं सदी के उत्तरार्द्ध में, एजेंसी घरानों ने बैंकों का विकास किया। बैंक ऑफ बंगाल, द बैंक ऑफ हिन्दुस्तान, ओरियंटल बैंक कॉरपोरेशन और द बैंक ऑफ वेस्टर्न इंडिया इनमें प्रमुख थे। इन बैंकों ने अपनी अलग-अलग कागजी मुद्राएं उर्दू, बंगला और देवनागरी लिपियों में मुद्रित करवाई। ऐसा करीब 100 साल तक चला।

ब्रिटिश सरकार ने 1861 में पेपर करेन्सी कानून बनाया। इसके बाद बाजार में उतरा 10 रुपए का नोट।

बाद में एक के बाद एक 20 रुपए, 5 रुपए, 100 रुपए, 50 रुपए, 500 रुपए और 1000 रुपए के नोट जारी किए गए।

आजादी के बाद वर्ष 1957 में भारत सरकार ने एक रुपए का नोट छापा।

भारतीय रुपए, 500 और 1000 के नोट को छोड़कर, अब भी नेपाल और भूटान सऱीखे देशों में मान्य हैं और चलते हैं।

Advertisement

नई कहानियां

PAN कार्ड के लिए ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन, फ़ॉलो करें ये आसान स्टेप्स

PAN कार्ड के लिए ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन, फ़ॉलो करें ये आसान स्टेप्स


रंगोली के इन डिज़ाइनों में दिखती है देश की संस्कृति की झलक, आसानी से बना सकते हैं आप

रंगोली के इन डिज़ाइनों में दिखती है देश की संस्कृति की झलक, आसानी से बना सकते हैं आप


जामिनी रॉय: एक ऐसा महान चित्रकार, जिन्होंने चित्रकारी को दिया नया आयाम

जामिनी रॉय: एक ऐसा महान चित्रकार, जिन्होंने चित्रकारी को दिया नया आयाम


ट्विटर यूज़र्स ने कुछ इस अंदाज़ में मनाई होली, फ़नी मीम्स की लगी झड़ी

ट्विटर यूज़र्स ने कुछ इस अंदाज़ में मनाई होली, फ़नी मीम्स की लगी झड़ी


पाक पीएम इमरान खान ने विश किया हैप्पी होली, ट्विटर पर लोगों ने लगा दी लताड़

पाक पीएम इमरान खान ने विश किया हैप्पी होली, ट्विटर पर लोगों ने लगा दी लताड़


Advertisement

ज़्यादा खोजी गई

और पढ़ें Business

नेट पर पॉप्युलर