इस राज्य में सबसे अधिक घरेलू हिंसा के शिकार हो रहे हैं पति, सैकड़ों मामले दर्ज

Updated on 16 May, 2018 at 11:13 am

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पति-पत्नी में सामंजस्य ही परिवार का निर्माण करता है और अगर सामंजस्य न हो तो फिर कलह का निर्माण हो जाता है। कलह की स्थिति में फिर वो सब होता है जो एक सभ्य समाज में नहीं होना चाहिए। परिवार समाज की एक आदर्श संस्था है और उसमें लोग पूरी निष्ठा और आस्था के साथ अपना योगदान देते हैं। पति-पत्नी को आपस में कई मामलों में समझौते करने होते हैं।

 

आजकल के अत्याधुनिक माहौल में महिलाओं को मुफीद अवसर मिले हुए हैं और घरेलू हिंसा की शिकार रही महिलाएं अब अटैकिंग हो गई हैं। नहीं-नहीं, ये हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि मध्य प्रदेश पुलिस के आंकड़े बता रहे हैं।

पुलिस ने आंकड़े जारी करते हुए पीड़ित पतियों की संख्या में लगातार हो रहे इजाफे पर प्रकाश डाला है।

 

 

 

पुलिस की त्वरित रिस्पांस सेवा नंबर 100 पर ऐसे कॉल अधिक संख्या में आ रहे हैं, जिनमें घरेलू हिंसा में पुरुष परेशान बताए जाते हैं। पुलिस को पतियों के अधिक फोन आ रहे हैं, जो पुलिस से मदद की गुहार लगाते हैं। हालांकि, यह बहुत ही विषम स्थिति है। इससे पुलिस महकमा भी सकते में आ गया है।

 


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पुलिस जनसंपर्क अधिकारी हेमंत शर्मा ने मीडिया को बतायाः

 

“मध्यप्रदेश में प्रत्येक माह औसतन 200 शिकायत दर्ज की जा रही हैं, जिनमें पति पीड़ित बताए जाते हैं। ऐसे अनेक मामले हो सकते हैं जिसमें पति लोकलाज या फिर भयवश मामले दर्ज ही नहीं करा पाते होंगे। इस तरह के मामले को घरेलू हिंसा के तहत ही ‘बीटिंग हसबैंड’ श्रेणी में रखा जाता है।”

 

 

आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि विभाग जनवरी 2018 से लेकर अब तक 802 से अधिक मामले दर्ज कर चुका है, जिनमें पति पीड़ित हैं। इससे नई बहस छिड़ गई है। साथ ही पतियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना भी जरूरी हो गया है।

 

ये मध्यप्रदेश के आंकड़े हैं, जबकि ऐसी वारदात अन्य जगहों पर भी होते हैं, लेकिन उस पर प्रकाश कम ही दिया जाता है।

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