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करियर चुनने को लेकर परेशान छात्रों को मिलते हैं ये 5 तरह के लोग, इसमें आप खुद को पाएंगे

Published on 9 June, 2018 at 12:01 pm By

आपकी हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी हो चुकी है और अब आगे करियर में इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट, लॉ या सीए क्या करें समझ नहीं आता। ऐसे में आप अपने आसपास के लोगों और दोस्तों से सलाह लेते होंगे। इसी दौरान आपकी मुलाकात कुछ ऐसे लोगों से होती है जो आपकी समस्या हल तो नहीं करते, लेकिन अपना बेकार का ज्ञान बघारकर आपको अपने लक्ष्य से ज़रूर भटका सकते हैं।


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इसलिए ऐसे लोगों से आपको सतर्क रहने की ज़रूरत है। चलिए आपको बताते हैं करियर की जद्दोजेहद में परेशान छात्रों को किस तरह के लोग मिलते हैं।

 

इंजीनियरिंग की माला जपने वाले

 

कोई इजीनियर दीदी, भईया आपको ज़रूर मिल जाएंगे जो ये कहेंगे कि ‘एक बार इंजीनियरिंग कर ले फिर तेरी लाइफ सेट हो जाएगी।’ 2 साल की कोचिंग करने के बाद किसी इंजीनियरिंग कॉलेज में मुश्किल से एडमिशन मिलता है फिर 4 साल जी तोड़ मेहनत। उसके बाद भी कोई गारंटी नहीं है कि कॉलेज से निकलते ही नौकरी मिल जाए, फिर भी इंजीनियरिंग को हो बेस्ट प्रोफेशन मानने वाले लोगों की कमी नहीं है। उन्हें लगता है कि इंजीनयरिंग की डिग्री मिलते ही सारी परेशानी खत्म हो जाएगी।

 

 

सिर्फ दोस्त बनाने की सलाह देने वाले


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आपके आसपास भी कोई न कोई तो ऐसा होगा ही जिसकी ज़िंदगी का बस एक ही मकसद होता है दोस्त बनाना और वो आपको भी यही सलाह देगा कि ‘दोस्त बनाओ यार, लोगों से मिलो और दोस्ती करो ये बहुत ज़रूरी है।’ अरे भई, माना की दोस्ती ज़रूरी है, मगर उससे पहले करियर ज़रूरी है। ऐसे लोगों से आप किसी अच्छी सलाह की उम्मीद तो बिल्कुल मत करिएगा।

 

 

काम की बात छोड़कर बाकी सब बातें करने वाले



 

कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें पॉंइंट की बात छोड़कर फालतू का ज्ञान बघारने में मज़ा आता है, जैसे वो आपसे कहेंगे, ‘मुंबई चला जा आगे की पढ़ाई के लिए एकदम मस्त शहर है यार, वहां की नाइटलाइफ तो शानदार है, स्ट्रीट फूड वड़ा पाव मुंह में पानी आ गया, मरीन ड्राइव पर शाम को बैठने का मज़ा ही कुछ और है।’ आप गए थे इनसे करियर की सलाह मांगने और ये आपको मुंबई टूर की कहानी सुनाने बैठ गए। अब इन्हें कौन समझाए कि आपके लिए अच्छा कॉलेज मायने रखता है न कि अच्छा शहर।

 

 

घर से चिपके रहने वाले

 

दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो चाहे जो हो जाए अपना घर नहीं छोड़ना चाहते और ऐसे लोग किसी को ऐसी सलाह भी नहीं देंगे जिसके लिए सामने वाले को घर से दूर जाना पड़े। आपने यदि दूसरे शहर में जाकर पढ़ने का फैसला किया है तो ये कहेंगे, ‘इतना दूर जाने की क्या ज़रूरत है अनजान शहर में पता नहीं कैसे लोग होंगे, यहां तो तुम्हारा परिवार है, दोस्त है यहीं कॉलेज खोज ले।’ आप ऐसे लोगों की इमोशनल बातों में बिल्कुल न फंसे, अपने दिमाग से सोचकर ही कोई फैसला लें।

 

 

सेल्फ लर्निंग पर विश्वास करने वाले

 

जो लोग खुद नहीं पढ़ पाए वो दूसरों को भी यही सलाह देते है कि पढ़ाई-लिखाई में कुछ नहीं रखा है, बस ज़िंदगी की रफ्तार के साथ बढ़ते रहिए। ऐसे लोग कहते हैं के किताबी पढ़ाई में कुछ नहीं रखा है प्रैक्टिकल ज्ञान ज़्यादा ज़रूरी, लेकिन आप ध्यान रखिए कि एकेडमिक पढ़ाई बहुत ज़रूरी होती है।


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