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मध्यकाल में भारत की इन पांच खतरनाक तोपों ने लड़ी बड़ी लड़ाइयां, दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए

Updated on 6 April, 2017 at 5:04 pm By

मध्यकाल में भारत में जंगों के दौरान तोपों के इस्तेमाल की परंपरा रही है। शुरू के दिनों में जो तोप इस्तेमाल किए जाते थे, वे बारूद के गोले नहीं दागते थे, बल्कि उनका इस्तेमाल पत्थर और लोहे के गोलों को दुश्मन सेना पर फेंकने के लिए किया जाता था। हालांकि, बाद में तकनीक में लगातार परिवर्तन की वजह से इससे बारूद के गोले भी दागे जाने लगे। हम यहां भारत के पांच तोपों का जिक्र करने जा रहे हैं, जो न केवल खतरनाक रहे हैं, बल्कि इनका सामरिक व ऐतिहासिक महत्व भी रहा है।


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इतिहासकार कहते हैं कि वर्ष 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई में बाबर ने पहली बार इब्राहीम लोदी के खिलाफ तोपों का सफल इस्तेमाल किया था। वहीं, बाबर ने एक बार फिर वर्ष 1528 में खानवा के युद्ध में राणा सांगा के खिलाफ तोपों का इस्तेमाल किया और विजयी हुआ। इस विजय के बाद ही भारत में मुगलिया सल्तनत की नींव रखी जा सकी थी।

WikimediaCommons

माना जाता है कि बाबर ने अगर तोपों का इस्तेमाल नहीं किया होता तो आज भारत का इतिहास कुछ और ही होता।

तोप आमतौर पर तीन प्रकार के रहे हैं। इनका इस्तेमाल पत्थर, लोहे के गोले और बारूद के गोले दागने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। पत्थर के गोले दागने वाले तोप का इस्तेमाल पहली बार 14वीं सदी में पश्चिमी यूरोप में किया गया था। हालांकि में बाद के दशकों में इसका डिजायन परिष्कृत हुआ और यह बारूद के गोले भी दागने लगा।

कहा जाता है कि मध्यकाल में दुनियाभर में उपयोग में लाई जा रही 11 ताकतवर तोपों में से पांच तो भारत में ही थे।

1. मलिक-ए-मैदान

इसका मतलब होता है जंग के मैदान का राजा। वर्ष 1549 में निर्मित यह तोप लोहे की थी और इसे बनवाया था बीजापुर के मोहम्मद-बिन-हुसैन ने। 700 mm मारक क्षमता वाली इस तोप से पहली बार लोहे का गोला दागा गया था। इसका वजन था 55 टन। इस तोप का नामकरण वर्ष 1565 में विजयनगर साम्राज्य के खात्मे के बाद किया गया था। कहा जाता है कि अधिक वजन होने की वजह से ब्रिटिश इसे अपने साथ इंग्लैंड नहीं ले जा सके थे।

2. तंजावुर का तोप

इस तोप को बनवाया गया था वर्ष 1620 में। इसका ताल्लुक है नायक शासन काल से। इसे दक्षिण भारत में तंजावुर शहर की रक्षा के लिए मुख्य द्वार पर अवस्थित किया गया था।



3. जयवाना

जयवाना को जयपुर की सीमा की रक्षा के लिए लगाया गया था। इसे वर्ष 1720 में राजा जय सिंह ने बनवाया था। इस तोप से बारूद का गोला दागा जा सकता था। इस तोप को इतना खतरनाक माना जाता था कि बड़ी सेना पीछे हटने को मजबूर हो जाती थी। इसे सीमा पर लाने के लिए कई हाथियों को लगाया गया था।

4. दाला मरदाना

दाला मरदाना तोप को 1565 में बनवाया गया था। इसके निर्माता थे जगन्नाथ कर्मकार और इसका ताल्लुक बिष्णुपुर साम्राज्य से रहा है। दाला का मतलब होता है दुश्मन और मरदाना का शाब्दिक कातिल होता है। यह तोप अपने नाम को चरितार्थ करता रहा है।

5. जहान कोसना

जहान कोसना नामक इस तोप का निर्माण वर्ष 1637 में किया गया था। जहान कोसना का शाब्दिक अर्थ है विश्व विनाशक। यह मुर्शिदाबाद आर्टिलरी का हिस्सा रहा है। बाद में शाहजहां के शासनकाल में इसका नाम बदलकर ढाका कर दिया गया।


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