तमाम रुकावटें कुसुमा को सपना पूरा करने से नहीं रोक सकी, बन गई कम्प्युटर इन्जीनियर

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Updated on 1 May, 2016 at 5:30 pm

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सपने कभी भी बड़े या छोटे नहीं होते। सपने बस सपने होते हैं। इसे सही साबित किया है बेंगलुरू में रहने वाली कुसुमा आर ने। कुसुमा के पिता शहर में टैक्सी चलाते हैं और मां स्कूल में सहायिका का काम करती हैं। तमाम परेशानियां और रुकावटें कुसुमा को उसका सपना पूरा करने से रोक नहीं सकीं।

23 वर्षीया कुसुमा अब कम्प्युटर सायन्स इन्जीनियर बन गई है और उसे नौकरी मिली है बहुराष्ट्रीय कंपनी डेल में।

कुसुमा के माता-पिता की आय बहुत अधिक नहीं थी। अभावों में पलने के बावजूद कुसुमा ने अपना लक्ष्य हासिल किया है।

टाइम्स ऑफ इन्डिया ने अपनी रिपोर्ट में कुसुमा के हवाले से लिखा हैः


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“मैनें जो कुछ भी किया है वह मेरे स्कूल और शिक्षकों की वजह से संभव हो सका है। उन्होंने मुझे कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि मैं किसी से कम हूं। उन्होंने सभी छात्रों को बराबर की नजर से देखा।”

कुसुमा ने बताया कि इस स्कूल के बारे में उसकी मां को अपने सहकर्मियों के माध्यम से पता चला था। तब उन्होंने उसे वहां पढ़ने के लिए भेजने का फैसला किया।

हालांकि, सफलता की यह यात्रा इतनी आसान भी नहीं थी। निम्न-मध्यमवर्गीय परिवार से आने और कम आमदनी की वजह से कदम-कदम पर सामने आने वाली वर्जनाएं कुसुमा के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही थीं। इसके बावजूद उसने अपनी यात्रा जारी रखी।

फिलहाल कुसुमा अपनी नई नौकरी में है और वहां उसे सहकर्मियों का साथ मिल रहा है।

कुसुमा के संघर्ष की दास्तान कई लोगों के लिए प्रेरणा साबित हो सकती है।

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