प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर चाहिए, लेकिन तस्वीर के लिए बुर्का नहीं छोड़ेंगी महिलाएं

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Updated on 26 Feb, 2017 at 1:43 pm

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केन्द्र सरकार चाहती है कि जिनके पास घर नहीं है, उन्हें जल्द से जल्द आवास मुहैया हो सके। इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े अधिकारी भी दिन-रात एक किए हुए हैं। इस स्कीम के तहत ग्रामीण इलाकों में बेघर लोगों को पक्के आवास दिए जाने की योजना है।

हालांकि, प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े अधिकारियों को एक अजीब तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

टाइम्स ऑफ इन्डिया की इस रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभार्थी मुस्लिम परिवार की महिलाएं बुर्का हटाकर तस्वीरें खिंचवाने को तैयार नहीं हैं। इन महिलाओं ने तस्वीर के लिए बुर्का हटाने से इन्कार कर दिया। यह घटना देहरादून की है।


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इस योजना के तहत अधिकारियों को लाभार्थियों की तस्वीर लेनी होती है, जिसे योजना के फॉर्म में लगाया जाता है। साथ ही आवास का आवंटन परिवार की महिला सदस्य के नाम पर ही होता है,ताकि गरीब परिवारों में महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।



रिपोर्ट में देहरादून के मुख्य विकास अधिकारी बंसीधर तिवारी के हवाले बताया गया हैः

“हमने महिलाओं को अपने स्तर पर समझाने का प्रयास किया और उन्हें बताया कि यह उनके ही फायदे के लिए होगा। लेकिन, उन्होंने अपनी संस्कृति का वास्ता देकर इससे इनकार कर दिया।”

रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह की समस्या होने की स्थिति में प्रधानमंत्री आवास योजना के अधिकारियों ने एक बीच का रास्ता निकाला है। इसके तहत महिलाओं की तस्वीरें तो बुर्के में ही ली गई हैं, लेकिन उनके हाथों में उनके नाम लिखी तख्तियां थमा दी गई, ताकि पहचान हो सके।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभार्थियों को पक्के मकान के निर्माण के लिए 1.60 लाख रुपए दिए जा रहे हैं। हालांकि, यह फंड तब रिलीज की जाती है जब लाभार्थी अपनी सभी जानकारी प्रधानमंत्री आवास योजना के पोर्टल पर अपलोड करें।


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